Tuesday, 13 June 2017

नानजिंग, चीन में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की सातवीं बैठक में भाग लेंगे राधा मोहन सिंह

           केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की सातवी बैठक हिस्सा लेने के लिए 15 जून,२०१७ की सुबह रवाना हो रहे हैं। यह बैठक 15 से 17 जून तक नानजिंग, चीन में चलेगी। 

        चीन के दौरे के मुख्य कार्यक्रम हैं। 15 जून गुरुवार सुबह ब्रिक्स एग्रीकल्चर कॉपरेशन वर्किंग ग्रुप की बैठक है। इसी दिन दोपहर की बैठक में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के संयुक्त घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा। 16 जून को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की सातवीं बैठक में अपनी बात रखेंगे तथा बैठक में चीन के वाइस मिनिस्टर वर्किंग ग्रुप मीटिंग के दस्तावेजों के नतीजों की समीक्षा प्रस्तुत करेंगे। इसी बैठक में ब्रिक्स मिनिस्टर ऑफ एग्रिकल्चर की सातवीं बैठक की संयुक्त घोषणा पत्र और ब्रिक्स देशों के एग्रीकल्चर कॉपरेशन एक्शन प्लान 2017-2021 को पारित किया जाएगा। 

      इसके बाद विभिन्न देशों के साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। तदोपरांत शाम को ब्रिक्स एग्रीकल्चरल कॉपरेशन फोरम का उद्घाटन किया जाएगा।

Tuesday, 6 June 2017

चीन सहित दुनिया के देश चखेंगे अब भारतीय आम का स्वाद

         चीन, ईरान, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया, मॉरीशस, कोरिया गणराज्‍य और संयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) के 21 प्रमुख आयातकों ने एपीडा द्वारा आयोजित आम क्रेता-विक्रेता बैठक (बीएसएम) में भाग लिया।

      देश भर के 100 से भी ज्‍यादा निर्यातकों ने इस क्रेता-विक्रेता बैठक में हिस्‍सा लिया। चीन की एक प्रमुख आयातक मेसर्स डालियान इदू ने भारतीय निर्यातकों के साथ बातचीत की और पेशकश किये गये भारतीय आम पर अच्‍छी प्रतिक्रि‍या व्‍यक्‍त की। कुछ प्रमुख निर्यातकों जैसे कि मेसर्स बॉम्‍बे एक्‍सपोर्ट्स, मेसर्स असर ब्रदर्स, केइबी एक्‍सपोर्ट्स ने बीएसएम के दौरान अच्‍छी प्रतिक्रि‍या मिलने के बारे में जानकारी दी। इस बैठक की एक खास बात यह भी रही कि इस दौरान आम की विभिन्‍न वाणिज्यिक किस्‍मों जैसे कि अल्फांसो, केसर, बंगानपल्ली, दशहरी, लंगड़ा, चौसा इत्‍यादि के लुभावने नमूने पेश किये गये।

          इसी तरह स्थानीय स्वदेशी किस्मों जैसे मल्लिका, पीटर, रुमानी, नीलम, हिममपसंद, अरकाअनमोल, फजली इत्‍यादि के नमूने भी बैठक के दौरान पेश किये गये। दस आम उत्‍पादक राज्‍यों के राज्‍य बागवानी विभागों ने अपने-अपने यहां उगाये जाने वाले आमों की विभिन्‍न किस्‍मों को प्रदर्शित किया। इन राज्‍यों को आमों की विभिन्‍न किस्‍मों को प्रदर्शित करने के लिए स्‍टॉल भी उपलब्‍ध कराये गये। एपीडा ने अपने पवेलियन में ताजे फलों की विस्‍तृत रेंज प्रदर्शित की, ताकि आयातकों को ताजे फलों के रूप में भारत की पेशकश से आयातक परिचित हो सकें। इसके अलावा आम के अनेक मूल्‍य वर्धित उत्‍पादों जैसे कि मैंगो पल्प, अचार, चटनी, जैम एवं जेली, जूस इत्‍यादि को भी इस दौरान प्रदर्शित किया गया।

             इस कार्यक्रम का उद्घाटन वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय में अपर सचिव आलोक वर्धन चतुर्वेदी ने किया और इस अवसर पर एपीडा के चेयरमैन डी. के. सिंह, कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव डॉ. शकील पी अहमद, कर्नाटक राज्‍य आम विकास एवं विपणन निगम के प्रबंध निदेशक कादिर गौड़ा, आंध्र प्रदेश के बागवानी आयुक्‍त चिरंजीव चौधरी, पश्चिम बंगाल की बागवानी आयुक्‍त सुश्री मुधमिता सिन्‍हा रे और विभिन्‍न राज्‍य सरकारों के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

चीन के बीजिंग में मिशन नवाचार एवं स्‍वच्‍छ ऊर्जा मंत्रि‍स्‍तरीय सम्‍मेलन में डॉ. हर्षवर्धन भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे

        विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की अगुवाई में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वितीय मिशन नवाचार एवं स्‍वच्‍छ ऊर्जा मंत्रिस्‍तरीय सम्‍मेलन में भाग लेगा। 

     इस सम्‍मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी शिरकत करेंगे। 18 माह पहले 30 नवंबर, 2015 को 20 देशों के राजनेता मिशन नवाचार (एमआई) का शुभारंभ करने के लिए एकजुट हुए थे। यह नवाचार की गति में तेजी लाने और स्‍वच्‍छ ऊर्जा को व्‍यापक रूप से किफायती एवं विश्‍व भर में सुगम्‍य बनाने के लिए एक उल्‍लेखनीय पंचवर्षीय प्रतिबद्धता है। मिशन नवाचार (एमआई) में अब 22 अर्थव्‍यवस्‍थाओं के साथ-साथ  यूरोपीय आयोग भी शामिल है जो यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्‍व करता है और स्‍वच्‍छ ऊर्जा से जुड़े अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में कुल वैश्विक सार्वजनिक वित्त पोषण के 80 प्रतिशत से भी ज्‍यादा का योगदान देता है। 

           यह नवाचार की गति बढ़ाने और इस स्‍वच्‍छ ऊर्जा क्रांति शुभारंभ के जरिये बदलाव लाने के लिए 22 सदस्‍य देशों एवं यूरोपीय संघ की ओर से समेकित प्रयास है, ताकि समय पर आर्थिक, ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ अन्‍य लक्ष्‍य हासिल किये जा सकें। भारत संचालन समिति का संस्‍थापक सदस्‍य है।

      इसके साथ ही भारत इन दो उप-समूहों का भी एक सदस्‍य है: संयुक्‍त अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी। उपर्युक्‍त बैठक के दौरान सात अभिनव चुनौतियों की घोषणा की जायेगी जिनमें से इन तीन चुनौतियों की अगुवाई भारत करता है: स्‍मार्ट ग्रिड, ग्रिड से इतर पहुंच और टिकाऊ जैव ईंधन।

Sunday, 4 June 2017

अंतर्राष्ट्रीय शांति व स्थिरता के समक्ष वैश्विक आतंकवाद सबसे गंभीर चुनौती

           केंद्रीय संसदीय मामले व कृषि तथा किसान कल्याण राज्य मंत्री एस.एस. अहलूवालिया ने नार्वे में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल की तीन दिन की यात्रा के दौरान उसका नेतृत्व किया। 

       यह यात्रा दोनों देशों के बीच संसदीय संबंध बढ़ाने के मकसद से की गई। यात्रा के दौरान शिष्टमंडल ने नार्वे सरकार के विभिन्न विभागों के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ मुलाकात की। इन बैठकों के दौरान अहलूवालिया ने कहा कि भारत और नार्वे को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष, समुद्री सहयोग, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, मत्स्य उद्योग, कृषि, बागवानी तथा कार्बनिक खेती के बारे में प्रौद्योगिकी के आदान प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग अधिक सुदृढ़ करना चाहिए। 

           आतंकवाद के वैश्विक खतरे के बारे में अहलूवालिया ने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय शांति और स्थिरता के समक्ष सबसे गंभीर चुनौती है। इससे मानवाधिकारों का हनन होता है और लोकतांत्रिक राष्ट्रों के सामाजिक तथा आर्थिक विकास में बाधा आती है। अहलूवालिया ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए। 

              उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है। आतंकवादियों को पनाह, हथियार, प्रशिक्षण या धन देने वाले राष्ट्रों को कतई सहन नहीं करने के पक्ष में है। अहलूवालिया ने कहा कि भारत और नार्वे संयुक्त राष्ट्र में एक दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। दोनों देशों को इस क्षेत्र में अधिक सहयोग करने की आवश्यकता है। 

           अहलूवालिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के भारत के दावे का समर्थन करने के लिए नार्वे का आभार व्यक्त किया। मत्स्य उद्योग के क्षेत्र में सहयोग के बारे में अहलूवालिया ने कहा कि जल-जीवपालन प्रणालियों का पुनश्चक्रण भारत के लिए नया विषय है। इस उच्च उत्पादन तकनीक के लिए भारत, नार्वे से तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता के आदान प्रदान की उम्मीद करता है। भारतीय शिष्टमंडल ने नार्वे में भारतीय समुदाय के साथ भी विचार विमर्श किया। भारतीय राजदूत देवराज प्रधान द्वारा आयोजित भोज में हिस्सा लिया।

Friday, 2 June 2017

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता पांच गुना

           केंद्रीय बिजली, कोयला, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा एवं खनन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने बर्लिन, लिपजिग और म्यूनिख की यात्रा की। मंत्री ने यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय और बिजनेस बैठकें कीं। 

        यात्रा की शुरुआत जर्मन विकास एजेंसी जीआईजेड (गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनल जुसामेनाबेट) के उपाध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफ बेयर के साथ बैठक से हुई। गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे भारत ने हाइड्रो और परमाणु समेत अपनी हरित ऊर्जा क्षमता को 100 जीडब्ल्यू से अधिक बढ़ाया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारत ने अपनी सौर ऊर्जा की क्षमता को वर्ष 2014 से पांच गुना अधिक बढ़ा दिया है। मंत्री ने जर्मन पक्ष को सूचित किया कि कैसे भारत ने किफायती नवीकरणीय ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए उसकी नीलामियों में सफलता प्राप्त की और जर्मनी, जो कि फीड इन टैरिफ (एफआईटी) से दूर हो रहा है, भी इसे अपना सकता है।

            130 से अधिक देशों में जीआईजेड की वैश्विक उपस्थिति को देखते हुए, गोयल ने ईईएसएल के साथ साझेदारी का प्रस्ताव रखा, जिससे भारत को अपने ऊर्जा दक्षता उत्पादों को दुनिया भर में वितरित करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने दीर्घकालिक धन, ग्रिड संतुलन, विद्युत वाहनों के विकास, ऑफ ग्रिड प्रणाली, हरित ऊर्जा कॉरिडॉर पर भी बात की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र के विजन 'मेक इन इंडिया मिटेलस्टांड (एमआईआईएम)' के मद्देनजर गोयल ने कुछ जर्मन कंपनियों से भेंट की और उनसे मेक इन इंडिया से जुड़ने व उसमें संभावनाएं तलाशने को लेकर विचार-विमर्श किया। बर्लिन और म्युनिख में आयोजित बैठकों के दौरान मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे जर्मन कंपनियां भारत में मेक इन इंडिया के तहत कम लागत पर अपना दुनिया भर के लिए उत्पाद बनाकर इस अवसर का लाभ उठा सकती हैं। 

           जर्मन और भारतीय कंपनियों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से गोयल ने सिफारिश की कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) सचिवालय सीआईआई, फिक्की आदि के सहयोग से मासिक बैठक करे। इस बैठक में वित्तीय कंपनियों समेत जर्मन और भारतीय कंपनियां शामिल हो सकती हैं। जर्मन पर्यावरण, प्राकृतिक संरक्षण, बीएमयूबी संघीय मंत्री डॉ. बारबरा हेंड्रिक्स और उनके अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक में गोयल ने दोहराया कि कैसे भारत ने श्री मोदी के नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा को आस्था का विषय बना लिया है और वह पेरिस प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। 

           बैठक में गोयल ने डॉ. हेंड्रिक्स को बताया कि भारत पेस समझौते में सतत जीवन शैली पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दोनों मंत्रियों में इस बात पर सहमति बनी कि नवीकरणीय ऊर्जा को एक बोझ की तरह नहीं बल्कि हरित ग्रह के निर्माण के लिए संभावनाओं की तरह लिया जाए। गोयल ने री-इनवेस्ट 2017 में भारत के साथ साझेदारी के लिए जर्मन पक्ष को आमंत्रित किया।

Thursday, 1 June 2017

अलेक्‍जेन्‍ड्रा को सर्बिया के राष्‍ट्रपति के पदभार ग्रहण करने पर बधाई

राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महामहिम अलेक्‍जेन्‍ड्रा वुइकिक के सर्बिया गणराज्‍य के राष्‍ट्रपति का पदभार ग्रहण करने पर बधाई दी है।

      राष्‍ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, ’02 अप्रैल, 2017 को हुए राष्‍ट्रपति चुनाव में आपकी बड़ी जीत के बाद सर्बिया के राष्‍ट्रपति का पदभार ग्रहण करने पर कृपया मेरा अभिनन्‍दन स्‍वीकार करें। भारत सर्बिया के साथ ऐतिहासिक और समय पर परखे संबंधों को महत्‍व देता है। हमारे द्विपक्षीय संबंध पारस्‍परिक विश्‍वास पर आधारित हैं और महत्‍वपूर्ण हित के विषयों पर हम एक दूसरे को समर्थन देते है। मुझे विश्‍वास है कि एक साथ काम करके हम अपने संबंधों की पूर्ण क्षमता को हासिल करेंगे।

      हमारे संबंध हाल में आपकी भारत यात्रा के दौरान और आगे बढ़े हैं। मैं महामहिम के कुशल क्षेम और स्‍वास्‍थ्‍य तथा सर्बिया के मैत्रीपूर्ण जनता की प्रगति और समृ‍द्धि की कामना करता हूं।’

Friday, 26 May 2017

देश के तीसरे सबसे बड़े भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की आधारशिला

                प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने असम के गौमुख में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान की आधारशिला रखी। इस अवसर पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस कार्य के लिए असम सरकार तथा वहां के मुख्‍यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल को बधाई दी। आईएआरआई की आधारशिला रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे भविष्‍य में पूरे क्षेत्र में एक सकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि 21वीं सदी की जरूरतों के साथ आज कृषि को विकसित करने की जरूरत है। 

         प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को बदलती तकनीकों का लाभ मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने आधुनिक कृषि और क्षेत्र की विशेष जरूरतों पर ध्‍यान केन्द्रित करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने 2022 तक, स्‍वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर किसानों की आय दोगुनी करने के अपने उद्देश्‍य पर भी बात की। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने गोगामुख, धेमाजी, असम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, असम के शिलान्यास समारोह के अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री जी ने संकल्प लिया है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करेंगे और हम ऐसा करके दिखाने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। इसी क्रम में, देश के पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि, एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में उत्पादन को बढ़ाने की अपार संभावनाओं को देखते हुए कृषकों का ज्ञानवर्धन करने, उचित कृषि संबंधी जानकारी देने तथा देश में कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा का उत्कृष्ट स्तर बनाये रखने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की एक और शाखा असम में खोली जा रही है। 


           उन्होंने कहा कि इस संस्थान की स्थापना कृषि उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के साथ उच्च स्तरीय शिक्षा एवं अनुसंधान प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है और आने वाले समय में देश के पूर्वोत्तर भाग में रहने वाले किसानों के जीवन स्तर में निश्चित तौर पर इससे बदलाव दिखाई पड़ेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और कृषि मंत्रालय की कुछ उपलब्धियां हैं।

             भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की यात्रा 1905 में उत्तरी बिहार के दरभंगा (समस्तीपुर) जिले के पूसा नामक जगह से प्रारंभ हुई थी। उस समय इसका नाम कृषि अनुसंधान संस्थान रखा गया था। बाद में इसका नाम 1911 में बदलकर इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च और 1919 में इंपीरियल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट किया गया। इसके बाद 29 जुलाई, 1936 में यह संस्थान दिल्ली में स्थानांतरित किया गया।

            स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पुनः इस संस्थान का नाम बदलकर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान रख दिया गया और 1958 में इसे डीम्ड यूनीवर्सिटी का दर्जा दिया गया। हरित क्रांति का सूत्रधार होने की महत्वपूर्ण भूमिका भी इसी संस्थान द्वारा यहां विकसित तकनीकियों, नई एवं उन्नत किस्मों के विकास तथा किसानों के खेतों पर किये गये वैज्ञानिक प्रदर्शनों के माध्यम से निभाई गई। देशभर में जिस तरह से आईआईटी और आईआईएम जैसी उच्च शिक्षा संस्थानों का जाल बिछा हुआ है, ठीक उसी तरह कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, दिल्ली की तर्ज पर देश में और कृषि अनुसंधान संस्थानों की स्थापना करने की योजना मोदी सरकार द्वारा बनाई गई है। इस क्रम में पहले झारखंड और अब असम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की शुरूआत की जा रही है।

             सरकार कृषि के प्रति कितनी गंभीर है यह इसी बात से पता चलता है कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वर्तमान सरकार ने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए गत चार वर्षों में कृषि बजट में (2014-15 से 2017-18) के लिए 1,64,415 करोड़ रूपये आवंटित किये गये जोकि यू.पी.ए. सरकार के वर्ष (2010-11 से 2013-14) 1,04,337 करोड़ रूपये की तुलना में 57.58 प्रतिशत अधिक है। जहां दूध का उत्पादन वर्ष 2011-2014 तीन वर्ष में 398 मिलियन मीट्रिक टन के अनुपात में वर्ष 2014-2017 में 465.5 मिलियन मीट्रिक टन है जो 16.9 प्रतिशत अधिक है। वहीं मछली उत्पादन में वर्ष 2011-14 तीन वर्ष में 272.88 लाख टन की तुलना में 2014-17 में बढकर 327.74 लाख टन हो गया जो 20.1 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी प्रकार वर्ष 2011-14 तीन वर्ष में 210.93 बिलियन की तुलना में अंडा उत्पादन 2014-17 में 248.72 बिलियन हो गया है जो 17.92 प्रतिशत अधिक है। शहद उत्पादन मे 2011-14 तीन वर्ष में 2,18,950 मि. टन की तुलना में वर्ष 2014-17 में 2,63,930 मि. टन हो गया है जो 20.54 प्रतिशत अधिक है। 

            वर्तमान सरकार द्वारा इस दौरान कई किसानोपयोगी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है, जिनमें मृदा उर्वरता में सुधार हेतु मृदा स्वास्थ्य कार्ड; जैविक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से परंपरागत कृषि विकास योजना के अलावा 400 करोड़ रुपये की लागत से शुरु की गई उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए जैविक वैल्यू चेन विकास मिशन का लाभ किसानों को मिल रहा है। देश की 585 थोक मंडियों को एक ई-प्लेटफार्म से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार या ई-नाम तेजी से काम कर रहा है। किसानों को आपदा से होने वाले नुकसान से बचाने हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना आदि का प्रमुख रूप से उल्लेख करना चाहूंगा। कृषि मंत्री ने आखिर में प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट किया कि उनके मार्गदर्शन में देश के पूर्वोत्तर हिस्से में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना का सपना पूरा हो रहा है।