Wednesday, 14 June 2017

साइबर सुरक्षा के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच समझौते पर हस्ताक्षर को मंजूरी

             प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को भारत और बांग्लादेश के बीच सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में पहले से हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के बारे में जानकारी दी गई।

         भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और बांग्लादेश के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रभाग के बीच अप्रैल 2017 में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह 5 वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होगा। इसके बाद दोनों पक्षों की आपसी लिखित सहमति द्वारा इसके प्रभावी रहने के दौरान किसी समय इस समझौते का विस्तार हो सकेगा।

            किसी एक पक्ष द्वारा अन्य पक्ष को छह माह की  लिखित पूर्व-सूचना के बाद इसे निरस्त किया जा सकेगा। सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र से जुड़ा यह समझौता स्वाभाविक तौर पर एक तकनीकी समझौता है और यह मुख्य रूप से ई-गवर्नेंस, एम-गवर्नेंस, ई-पब्लिक सर्विस डिलीवरी, साइबर सुरक्षा आदि पर जोर देता है।

          इस समझौते का लक्ष्य भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा बांग्लादेश में कारोबार के अवसरों और सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार की संभावनाएं तलाशना तथा भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है, जिससे अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।

भारत को एक बाजार की बजाय वैश्विक खाद्य फैक्ट्री बनाने के लक्ष्य

        खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने एएनयूजीए के आयोजकों के साथ संयुक्‍त सम्‍मेलन को संबोधित किया। एएनयूजीए खाद्य उद्योग के लिए एक अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार मंच है जो कि जर्मनी के कोलंगे में आयोजित होगा। 

       उन्‍होंने कोएल्‍नमेसे जीएमबीएच, (एएनयूजीए के आयो‍जक), प्रमुख परिचालन अधिकारी श्रीमती कैथरिना सी हमा के साथ समझौता ज्ञापन पर भी हस्‍ताक्षर किये। खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री ने कहा कि यह भारत के लिए सम्मान की विषय है कि वह एक सम्मानित अंतर्राष्ट्रीय समारोह में साझेदार देश बनने जा रहा है। इससे हमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ है। 

           मंत्री ने यह भी कहा कि खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग के समक्ष बहुत सारी चुनौतियां हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में हुए बदलावों के कारण उद्योग बाधाओं से पार पाने के लिए तैयार है। श्रीमती बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों में हमारी सरकार ने 9 नये मेगा फूड पार्क शुरू किये हैं, आपूर्ति अवसंरचना को मजबूत किया है, 6 हजार करोड़ रूपये के आवंटन से किसान संपदा योजना का क्रियान्वयन किया है, नाबार्ड के साथ 2 हजार करोड़ रुपये का कोष बनाया है जो वरीयता के आधार पर खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योगों को ऋण मुहैया करायेगा, करों को तर्कसंगत बनाया है, खाद्य क्षेत्र के खुदरा बाजार में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दी है इत्यादि। 


              इन कदमों से सरकार के भारत को एक बाजार की बजाय वैश्विक खाद्य फैक्ट्री बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा जर्मनी के कोलंगे में ब्रांड एएनयूजीए के साथ ब्रांड इंडिया भी सामानांतर खड़ा दिखाई देगा। श्रीमती बादल ने कहा दरअसल भारत सरकार द्वारा आयोजित वर्ल्ड फूड इंडिया में जर्मनी को साझेदार के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है। मंत्री ने जर्मनी में एएनयूजीए और फ्रांस में एसआईएएल जैसी अंतर्राष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनियों में भारत के भाग लेने से खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग की शक्तियों को प्रदर्शित के महत्व को स्वीकार किया।

            श्रीमती बादल ने जोर देकर कहा खाद्य नीति सभी बाधाओं को दूर करने और किसानों के जीवन को बदलने क काम करेगी। खाद्य प्रसंस्करण के उद्योगों के विकास से वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। हमें अपनी किसानों की तकनीक को उन्नत करना होगा और ना केवल खाद्य प्रसंस्करण में बल्कि कृषि प्रोद्यौगिकी में निवेश की आवश्यकता है। 

            मंत्री ने कहा कि हमें पश्चिमी देशों से सीखना होगा कि किस तरह से पैदावार और परिवहन के स्तर पर अपव्यय को नियंत्रित किया जाए। इस अवसर पर श्रीमती काठरिना सी हमा ने कहा कि उन्हें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत एएनयूजीए 2017 में साझेदार देश होगा। एएनयूजीए 2015 में 135 भारतीय प्रदर्शक थे वहीं कोलंगे में 7 अक्तूबर से 11 अक्तूबर तक एएनयूजीए 2017 में 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों के हिस्सा लेने की आशा जतायी जा रही है।

             एएनयूजीए 2017 में पहली बार खाद्य उद्योग में ई-कॉमर्स केंद्रित होगा। श्रीमती हमा ने कहा कि भारतीय खाद्य उद्योग को उसकी क्षमता और पाक कला संबंधी प्रतिस्पर्धा के लिए जाना जाता है। दुनिया भारतीय पाक व्यंजनों और इसकी विविधता की तरफ आकर्षित है। भारत में विविध प्रकार के मसाले पाये जाते हैं जो विश्व भर को निर्यात किये जाते हैं। उन्होंने भारत सरकार को नये मार्ग और नई पहलों के लिए बधाई दी।

Tuesday, 13 June 2017

नानजिंग, चीन में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की सातवीं बैठक में भाग लेंगे राधा मोहन सिंह

           केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की सातवी बैठक हिस्सा लेने के लिए 15 जून,२०१७ की सुबह रवाना हो रहे हैं। यह बैठक 15 से 17 जून तक नानजिंग, चीन में चलेगी। 

        चीन के दौरे के मुख्य कार्यक्रम हैं। 15 जून गुरुवार सुबह ब्रिक्स एग्रीकल्चर कॉपरेशन वर्किंग ग्रुप की बैठक है। इसी दिन दोपहर की बैठक में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के संयुक्त घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा। 16 जून को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की सातवीं बैठक में अपनी बात रखेंगे तथा बैठक में चीन के वाइस मिनिस्टर वर्किंग ग्रुप मीटिंग के दस्तावेजों के नतीजों की समीक्षा प्रस्तुत करेंगे। इसी बैठक में ब्रिक्स मिनिस्टर ऑफ एग्रिकल्चर की सातवीं बैठक की संयुक्त घोषणा पत्र और ब्रिक्स देशों के एग्रीकल्चर कॉपरेशन एक्शन प्लान 2017-2021 को पारित किया जाएगा। 

      इसके बाद विभिन्न देशों के साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। तदोपरांत शाम को ब्रिक्स एग्रीकल्चरल कॉपरेशन फोरम का उद्घाटन किया जाएगा।

Tuesday, 6 June 2017

चीन सहित दुनिया के देश चखेंगे अब भारतीय आम का स्वाद

         चीन, ईरान, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया, मॉरीशस, कोरिया गणराज्‍य और संयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) के 21 प्रमुख आयातकों ने एपीडा द्वारा आयोजित आम क्रेता-विक्रेता बैठक (बीएसएम) में भाग लिया।

      देश भर के 100 से भी ज्‍यादा निर्यातकों ने इस क्रेता-विक्रेता बैठक में हिस्‍सा लिया। चीन की एक प्रमुख आयातक मेसर्स डालियान इदू ने भारतीय निर्यातकों के साथ बातचीत की और पेशकश किये गये भारतीय आम पर अच्‍छी प्रतिक्रि‍या व्‍यक्‍त की। कुछ प्रमुख निर्यातकों जैसे कि मेसर्स बॉम्‍बे एक्‍सपोर्ट्स, मेसर्स असर ब्रदर्स, केइबी एक्‍सपोर्ट्स ने बीएसएम के दौरान अच्‍छी प्रतिक्रि‍या मिलने के बारे में जानकारी दी। इस बैठक की एक खास बात यह भी रही कि इस दौरान आम की विभिन्‍न वाणिज्यिक किस्‍मों जैसे कि अल्फांसो, केसर, बंगानपल्ली, दशहरी, लंगड़ा, चौसा इत्‍यादि के लुभावने नमूने पेश किये गये।

          इसी तरह स्थानीय स्वदेशी किस्मों जैसे मल्लिका, पीटर, रुमानी, नीलम, हिममपसंद, अरकाअनमोल, फजली इत्‍यादि के नमूने भी बैठक के दौरान पेश किये गये। दस आम उत्‍पादक राज्‍यों के राज्‍य बागवानी विभागों ने अपने-अपने यहां उगाये जाने वाले आमों की विभिन्‍न किस्‍मों को प्रदर्शित किया। इन राज्‍यों को आमों की विभिन्‍न किस्‍मों को प्रदर्शित करने के लिए स्‍टॉल भी उपलब्‍ध कराये गये। एपीडा ने अपने पवेलियन में ताजे फलों की विस्‍तृत रेंज प्रदर्शित की, ताकि आयातकों को ताजे फलों के रूप में भारत की पेशकश से आयातक परिचित हो सकें। इसके अलावा आम के अनेक मूल्‍य वर्धित उत्‍पादों जैसे कि मैंगो पल्प, अचार, चटनी, जैम एवं जेली, जूस इत्‍यादि को भी इस दौरान प्रदर्शित किया गया।

             इस कार्यक्रम का उद्घाटन वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय में अपर सचिव आलोक वर्धन चतुर्वेदी ने किया और इस अवसर पर एपीडा के चेयरमैन डी. के. सिंह, कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव डॉ. शकील पी अहमद, कर्नाटक राज्‍य आम विकास एवं विपणन निगम के प्रबंध निदेशक कादिर गौड़ा, आंध्र प्रदेश के बागवानी आयुक्‍त चिरंजीव चौधरी, पश्चिम बंगाल की बागवानी आयुक्‍त सुश्री मुधमिता सिन्‍हा रे और विभिन्‍न राज्‍य सरकारों के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

चीन के बीजिंग में मिशन नवाचार एवं स्‍वच्‍छ ऊर्जा मंत्रि‍स्‍तरीय सम्‍मेलन में डॉ. हर्षवर्धन भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे

        विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की अगुवाई में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वितीय मिशन नवाचार एवं स्‍वच्‍छ ऊर्जा मंत्रिस्‍तरीय सम्‍मेलन में भाग लेगा। 

     इस सम्‍मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी शिरकत करेंगे। 18 माह पहले 30 नवंबर, 2015 को 20 देशों के राजनेता मिशन नवाचार (एमआई) का शुभारंभ करने के लिए एकजुट हुए थे। यह नवाचार की गति में तेजी लाने और स्‍वच्‍छ ऊर्जा को व्‍यापक रूप से किफायती एवं विश्‍व भर में सुगम्‍य बनाने के लिए एक उल्‍लेखनीय पंचवर्षीय प्रतिबद्धता है। मिशन नवाचार (एमआई) में अब 22 अर्थव्‍यवस्‍थाओं के साथ-साथ  यूरोपीय आयोग भी शामिल है जो यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्‍व करता है और स्‍वच्‍छ ऊर्जा से जुड़े अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में कुल वैश्विक सार्वजनिक वित्त पोषण के 80 प्रतिशत से भी ज्‍यादा का योगदान देता है। 

           यह नवाचार की गति बढ़ाने और इस स्‍वच्‍छ ऊर्जा क्रांति शुभारंभ के जरिये बदलाव लाने के लिए 22 सदस्‍य देशों एवं यूरोपीय संघ की ओर से समेकित प्रयास है, ताकि समय पर आर्थिक, ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ अन्‍य लक्ष्‍य हासिल किये जा सकें। भारत संचालन समिति का संस्‍थापक सदस्‍य है।

      इसके साथ ही भारत इन दो उप-समूहों का भी एक सदस्‍य है: संयुक्‍त अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी। उपर्युक्‍त बैठक के दौरान सात अभिनव चुनौतियों की घोषणा की जायेगी जिनमें से इन तीन चुनौतियों की अगुवाई भारत करता है: स्‍मार्ट ग्रिड, ग्रिड से इतर पहुंच और टिकाऊ जैव ईंधन।

Sunday, 4 June 2017

अंतर्राष्ट्रीय शांति व स्थिरता के समक्ष वैश्विक आतंकवाद सबसे गंभीर चुनौती

           केंद्रीय संसदीय मामले व कृषि तथा किसान कल्याण राज्य मंत्री एस.एस. अहलूवालिया ने नार्वे में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल की तीन दिन की यात्रा के दौरान उसका नेतृत्व किया। 

       यह यात्रा दोनों देशों के बीच संसदीय संबंध बढ़ाने के मकसद से की गई। यात्रा के दौरान शिष्टमंडल ने नार्वे सरकार के विभिन्न विभागों के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ मुलाकात की। इन बैठकों के दौरान अहलूवालिया ने कहा कि भारत और नार्वे को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष, समुद्री सहयोग, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, मत्स्य उद्योग, कृषि, बागवानी तथा कार्बनिक खेती के बारे में प्रौद्योगिकी के आदान प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग अधिक सुदृढ़ करना चाहिए। 

           आतंकवाद के वैश्विक खतरे के बारे में अहलूवालिया ने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय शांति और स्थिरता के समक्ष सबसे गंभीर चुनौती है। इससे मानवाधिकारों का हनन होता है और लोकतांत्रिक राष्ट्रों के सामाजिक तथा आर्थिक विकास में बाधा आती है। अहलूवालिया ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए। 

              उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है। आतंकवादियों को पनाह, हथियार, प्रशिक्षण या धन देने वाले राष्ट्रों को कतई सहन नहीं करने के पक्ष में है। अहलूवालिया ने कहा कि भारत और नार्वे संयुक्त राष्ट्र में एक दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। दोनों देशों को इस क्षेत्र में अधिक सहयोग करने की आवश्यकता है। 

           अहलूवालिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के भारत के दावे का समर्थन करने के लिए नार्वे का आभार व्यक्त किया। मत्स्य उद्योग के क्षेत्र में सहयोग के बारे में अहलूवालिया ने कहा कि जल-जीवपालन प्रणालियों का पुनश्चक्रण भारत के लिए नया विषय है। इस उच्च उत्पादन तकनीक के लिए भारत, नार्वे से तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता के आदान प्रदान की उम्मीद करता है। भारतीय शिष्टमंडल ने नार्वे में भारतीय समुदाय के साथ भी विचार विमर्श किया। भारतीय राजदूत देवराज प्रधान द्वारा आयोजित भोज में हिस्सा लिया।

Friday, 2 June 2017

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता पांच गुना

           केंद्रीय बिजली, कोयला, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा एवं खनन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने बर्लिन, लिपजिग और म्यूनिख की यात्रा की। मंत्री ने यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय और बिजनेस बैठकें कीं। 

        यात्रा की शुरुआत जर्मन विकास एजेंसी जीआईजेड (गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनल जुसामेनाबेट) के उपाध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफ बेयर के साथ बैठक से हुई। गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे भारत ने हाइड्रो और परमाणु समेत अपनी हरित ऊर्जा क्षमता को 100 जीडब्ल्यू से अधिक बढ़ाया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारत ने अपनी सौर ऊर्जा की क्षमता को वर्ष 2014 से पांच गुना अधिक बढ़ा दिया है। मंत्री ने जर्मन पक्ष को सूचित किया कि कैसे भारत ने किफायती नवीकरणीय ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए उसकी नीलामियों में सफलता प्राप्त की और जर्मनी, जो कि फीड इन टैरिफ (एफआईटी) से दूर हो रहा है, भी इसे अपना सकता है।

            130 से अधिक देशों में जीआईजेड की वैश्विक उपस्थिति को देखते हुए, गोयल ने ईईएसएल के साथ साझेदारी का प्रस्ताव रखा, जिससे भारत को अपने ऊर्जा दक्षता उत्पादों को दुनिया भर में वितरित करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने दीर्घकालिक धन, ग्रिड संतुलन, विद्युत वाहनों के विकास, ऑफ ग्रिड प्रणाली, हरित ऊर्जा कॉरिडॉर पर भी बात की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र के विजन 'मेक इन इंडिया मिटेलस्टांड (एमआईआईएम)' के मद्देनजर गोयल ने कुछ जर्मन कंपनियों से भेंट की और उनसे मेक इन इंडिया से जुड़ने व उसमें संभावनाएं तलाशने को लेकर विचार-विमर्श किया। बर्लिन और म्युनिख में आयोजित बैठकों के दौरान मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे जर्मन कंपनियां भारत में मेक इन इंडिया के तहत कम लागत पर अपना दुनिया भर के लिए उत्पाद बनाकर इस अवसर का लाभ उठा सकती हैं। 

           जर्मन और भारतीय कंपनियों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से गोयल ने सिफारिश की कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) सचिवालय सीआईआई, फिक्की आदि के सहयोग से मासिक बैठक करे। इस बैठक में वित्तीय कंपनियों समेत जर्मन और भारतीय कंपनियां शामिल हो सकती हैं। जर्मन पर्यावरण, प्राकृतिक संरक्षण, बीएमयूबी संघीय मंत्री डॉ. बारबरा हेंड्रिक्स और उनके अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक में गोयल ने दोहराया कि कैसे भारत ने श्री मोदी के नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा को आस्था का विषय बना लिया है और वह पेरिस प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। 

           बैठक में गोयल ने डॉ. हेंड्रिक्स को बताया कि भारत पेस समझौते में सतत जीवन शैली पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दोनों मंत्रियों में इस बात पर सहमति बनी कि नवीकरणीय ऊर्जा को एक बोझ की तरह नहीं बल्कि हरित ग्रह के निर्माण के लिए संभावनाओं की तरह लिया जाए। गोयल ने री-इनवेस्ट 2017 में भारत के साथ साझेदारी के लिए जर्मन पक्ष को आमंत्रित किया।