Sunday, 6 August 2017

भारत को चाबहार बन्दरगाह पर 2018 में परिचालन की उम्मीद

       सड़क परिवहन व राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री नितीन गडकरी ने कहा कि सरकार ईरान में चाबहार बन्दरगाह के विकास के लिए कृत संकल्प है। 

     आशा है कि 2018 में इस पर परिचालन आरम्भ हो जाएगा। नीतिन गडकरी तेहरान में राष्ट्रपति हसन रूहानी द्वारा दूसरी बार कार्यभार संभालने पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के तौर वहां गए है। ईरान दौरे की पूर्व संध्या पर मंत्री ने कहा कि भारत व ईरान के बीच प्रगाढ़ ऐतिहासिक संबंध है। नितिन गडकरी ने जानकारी दी कि चाबहार बन्दरगाह पर निर्माण कार्य पहले से आरम्भ हो गया है।
      भारत सरकार ने बन्दरगाह के विकास के लिए छः बिलियन रूपये आबंटित किये हैं। इनमे से उपकरणों के लिए 380 करोड़ रुपये धनराशि की निविदा को पहले से अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कार्य को शीघ्रता से पूरा करने के लिए ईरान सरकार आवश्यक अनुमोदनों को स्वीकृति प्रदान कर देगी। 
     गडकरी ने कहा कि चाबहार बन्दरगाह दोनों राष्ट्रों के सम्बन्धों एवं इस क्षेत्र में व्यापार एवं कारोबार को बढ़ावा देगा। चाहबहार बन्दरगाह दक्षिण पूर्वी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित है। यह बन्दरगाह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बहुत उपयोगी है।
       पिछले साल मई में भारत और ईरान के बीच हुए सम्झौते के अनुसार भारत चाहबहार बन्दरगाह के पहले चरण के लिए दो बर्थ शुरू और उपकरणों से लैस करेगा। 10 वर्ष की लीज पर 85.21 मिलियन (अमरिकी डॉलर) का पूञ्जी निवेश किया जाएगा और वार्षिक राजस्व 22.95 मिलियन होगा।

Friday, 4 August 2017

जनरल बिपिन रावत ने कज़ाखस्तान के सेना प्रमुख से मुलाकात की

         जनरल बिपिन रावत छह दिवसीय कज़ाखस्तान और तुर्कमेनिस्तान के दौरे पर हैं। उन्होंने कज़ाखस्तान के थलसेना प्रमुख से मुलाकात कर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने संबंधी विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। 

      दोनों देश नवंबर 2017 में हिमाचल प्रदेश के बकलोह में संयुक्त सैन्य अभ्यास करने पर पारस्परिक रूप से सहमत हुए। जनरल रावत ने संयुक्त राष्ट्र शांति प्रक्रिया में कज़ाखस्तान की तैनाती को भारत की ओर समर्थन का वादा किया। 
      कज़ाखस्तान ने उग्रवाद विरोधी ऑपरेशन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, सेना शिक्षा और भारत में सैन्यकर्मियों के प्रशिक्षण के संबंध में सहायता की मांग की।
      भारतीय सेना प्रमुख ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने 36 एयर असॉल्ट ब्रिगेड दौरे के दौरान कज़ाख सेना के शानदार प्रदर्शन एवं पराक्रम की सराहना की। जनरल बिपिन रावत कल तुर्कमेनिस्तान के लिए रवाना होंगे।

Wednesday, 2 August 2017

भारत-स्‍पेन में अक्षय ऊर्जा सहयोग

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत–स्‍पेन सहयोग पर भारत और स्‍पेन के बीच हुए सहमति पत्र (एमओयू) से अवगत कराया गया है।

    इस एमओयू पर स्‍पेन में 30 मई, 2017 को हस्‍ताक्षर किये गये थे। इस एमओयू से विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और सूचनाओं की नेटवर्किंग के जरिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढाने में मदद मिलेगी। दोनों पक्षों ने सहकारी संस्‍थागत रिश्‍ते का एक समुचित आधार स्‍थापित करने का लक्ष्‍य रखा है, ताकि आपसी लाभ वाली समानता एवं पारस्‍परिकता के आधार पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित मसलों पर तकनीकी द्विपक्षीय सहयोग को प्रोत्‍साहित किया जा सके। 
      इस एमओयू के तहत एक संयुक्‍त कार्यकारी समिति के गठन की परिकल्‍पना की गई है, जो सहयोग के क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों की समीक्षा एवं निगरानी करने के साथ-साथ उन पर चर्चाएं भी करेगी।

ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक में ई-कामर्स सहयोग की पहल

       ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों की सातवीं बैठक संघाई में 1-2 अगस्त को हुई। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में 6 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल शामिल हुआ।

      इसमें विश्व व्यापार संगठन में जनसंपर्क अधिकारी और राजदूत जे एस दीपक भी शामिल थे। बैठक की अध्यक्षता चीन के वाणिज्य मंत्री ज़ोंग शन ने की। दक्षिण अफ्रीका के व्यापार और उद्योग मंत्री रोब डेविस, ब्राजील के उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य एवं सेवा सचिव मारसेलो माइया टवेयर्स डी अराउजो और रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम ओरेश्किन भी अपने-अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक में शरीक हुए। 
        ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों ने 2 अगस्त पूर्वाह्न चीन के उप-प्रधान मंत्री वांग यंग से औपचारिक मुलाकात की। बैठक से हटकर 1 अगस्त पूर्वाह्न चीन के वाणिज्य मंत्री और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के बीच द्वीपक्षीय बैठक हुई। 
       बैठक के बाद ब्रिक्स देशों में सेवाओं में व्यापार पर सहयोग की रूपरेखा, ब्रिक्स ई-कामर्स सहयोग पहल, ब्रिक्स आईपीआर सहयोग दिशा-निर्देश, ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने का प्रारूप, ब्रिक्स मॉडल ई-पोर्ट नेटवर्क के संदर्भ की शर्तें, ब्रिक्स निवेश सुविधा की रूपरेखा दस्तावेज स्वीकार किए गए।

Friday, 28 July 2017

भारत का ब्रिक्‍स में सामाजिक सुरक्षा सहयोग के संस्‍थानीकरण का समर्थन

      श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बंडारू दत्तात्रेय के नेतृत्व में भारतीय शिष्टमंडल ने चीन के चोंगगिंग में आयोजित ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया।

      चीन वर्ष 2017 के लिए ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक का अध्यक्ष है। भारतीय शिष्टमंडल में एम सत्यवती, सचिव (श्रम और रोजगार), मनीष गुप्‍ता, संयुक्‍त सचिव, अनुजा बापट, निदेशक और प्रो. शशिकुमार, वरिष्‍ठ फेलो, वीवीजीएनएलआई शामिल थे।
        बैठक का समापन चोंगगिंग, चीन में ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों द्वारा ब्रिक्‍स श्रम और रोजगार मंत्रिस्‍तरीय घोषणा पत्र को स्‍वीकार किए जाने के साथ हुआ। इस घोषणा पत्र में ब्रिक्‍स देशों के लिए महत्‍वपूर्ण विविध क्षेत्रों को कवर किया गया।
      साथ ही भारत द्वारा उचित संस्‍थानीकरण के माध्‍यम से इन क्षेत्रों में सहयोग और सहकारिता को सुदृढ़ता प्रदान करने का आह्वान किया गया। इन क्षेत्रों में कार्य के भविष्‍य के बारे में गवर्नेंस, ब्रिक्‍स में विकास के लिए कौशल, सार्वभौमिक और टिकाऊ सामाजिक सुरक्षा प्रणालियां, श्रम अनुसंधान संस्‍थानों का ब्रिक्‍स नेटवर्क, ब्रिक्‍स सामाजिक सुरक्षा सहयोग प्रारूप और ब्रिक्‍स उद्यमिता अनुसंधान शामिल हैं।
       इस अवसर पर बंडारू दत्‍तात्रेय ने कहा कि अंशकालिक कार्य, अस्‍थायी कार्य, निश्चित अवधि का अनुबंध और उपअनुबंध, घर से किया जाने वाला कार्य, आदि जैसे रोजगार के गैर-मानक स्‍वरूपों के उदय के मद्देनजर ब्रिक्‍स देशों को ‘कार्य के भविष्‍य’ की चुनौतियों से निपटने में सहयोग करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के कार्य ब्रिक्‍स देशों में रोजगार बाजारों का स्‍वरूप बदल रहे हैं। 
      ब्रिक्‍स देशों के श्रम संस्‍थानों की नेटवर्किंग से सूचना के नियमित आदान-प्रदान और इस क्षेत्र में तथा अन्‍य साझा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाए जाने की व्‍यवस्‍था तैयार हो सकती है। श्रम और रोजगार मंत्री ने दोहराया कि भारत ने विश्‍व आपूर्ति श्रृंखला में हमेशा सीबीडीआर के सिद्धांतों का पालन किया है और उसे खुशी है कि ब्रिक्‍स देशों ने भी इसी नीतिगत दृष्टिकोण को दोहराया है। दत्‍तात्रेय ने कहा कि प्रभावी और पारदर्शी श्रम गवर्नेंस के ढांचे का निर्माण करने में प्रौद्योगिकी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 
        उन्‍होंने कहा कि भारत में सेवाओं को प्रभावी, समयबद्ध और कुशलता से प्रदान करने के लिए तथा वित्‍तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार सृजन और कौशल सहित सरल और पारदर्शी अनुपालन ढांचा तैयार करने के लिए आईसीटी का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। दत्‍तात्रेय ने जोर देकर कहा कि कौशल न केवल कामगारों की रोजगार की क्षमता में व़द्धि करता है, बल्कि नियोक्‍ताओं की उत्‍पादकता भी बढ़ाता है, जिससे देश में संवर्धित उत्‍पादन, संवर्धित राजस्‍व प्रवाह और संवर्धित जीडीपी का चक्र तैयार होता है। 
          भारत ने कौशल के जरिए गरीबी उन्‍मूलन और उसमें कमी लाने संबंधी ब्रिक्‍स की कार्ययोजना का अनुमोदन किया। इस कार्य योजना में अन्‍य बातों के अलावा, समग्र राष्‍ट्रीय योजना में गरीबों को शामिल करने की नीतिगत सिफारिशें शामिल हैं, ताकि व्‍यवसायिक प्रशिक्षण, बेहतर आजीवन व्‍यवसायिक प्रशिक्षण और शिक्षण प्रणालियां, अनुसंधान संबंधी पहल के लिए अच्‍छी गुणवत्‍ता वाली प्रशिक्षुता को बढ़ावा, सरकारों, क्षेत्रों और उद्यमों के बीच सहयोग मजबूत बनाना संभव हो सके तथा ऐसे गठबंधन बनाने के लिए ब्रिक्‍स राष्‍ट्रीय अनुसंधान संस्‍थानों के नेटवर्क का इस्‍तेमाल किया जा सके।
     भारत ने ब्रिक्‍स द्वारा व्‍यक्‍त की गई सामूहिक प्रतिबद्धताओं को आगे ले जाने के लिए चीन की सराहना की। भारत ने ब्रिक्‍स के लिए प्रस्‍तावित सामाजिक सुरक्षा सहयोग प्रारूप के संस्‍थानीकरण का समर्थन किया, क्‍योंकि इससे हमें सामाजिक सुरक्षा के सार्वभौमिकरण विशेषकर कार्य के मानक स्‍वरूपों के बारे में ब्रिक्‍स के अन्‍य सदस्‍य देशों द्वारा अपनाई जा रही रणनीतियों का पता चल सकेगा। 
       उन्‍होंने कहा कि श्रम बाजार सूचना में विषमता हम सभी के लिए बड़ी चुनौती है। उन्‍होंने कहा कि इस संदर्भ में राष्‍ट्रीय श्रम संस्‍थानों का नेटवर्क एकीकृत अनुसंधान और सूचना साझा करने के लिए महत्‍वपूर्ण संभावनाएं प्रस्‍तुत करता है। दत्‍तात्रेय ने कहा कि यह नेटवर्क उपयुक्‍त श्रम और रोजगार मामलों पर साझा दृ‍ष्टिकोण कायम करने में हमारी सहायता भी करेगा।
      उन्‍होंने कहा कि नवोन्‍मेष और उद्यमिता को प्रोत्‍साहन देना भारत के लिए महत्‍वपूर्ण प्राथमिकता है। भारत ने ब्रिक्‍स उद्यमिता पहल को मजबूती प्रदान करने के लिए ब्रिक्‍स के सदस्‍य देशों के साथ मिलकर कार्य करने की इच्‍छा प्रकट की। ब्रिक्‍स श्रम और रोजगार मंत्र‍िस्‍तरीय घोषणा पत्र अब चीन में होने वाले राष्‍ट्राध्‍यक्षों/शासनाध्‍यक्षों के शिखर सम्‍मेलन में प्रस्‍तुत किया जाएगा।

Thursday, 20 July 2017

वैश्विक चुनौतियों से निपटने का एकमात्र साधन सामूहिक जिम्मेदारी

         केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के प्रमुख सदस्‍य देशों के प्रतिनिधियों, महानिदेशक डब्‍ल्‍यूटीओ और अंकटाड के महासचिव के साथ परस्‍पर विचार विमर्श करने के लिए जिनेवा का दौरा किया। 

    विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक के साथ अपनी बैठक के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने यह उल्‍लेख किया कि भारत डब्ल्यूटीओ के ग्यारहवें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन ('एमसी 11') में किस प्रकार के परिणामों को देखना चाहता है। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि एमसी 11 के परिणामों में खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों (पीएसएच) के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग के बारे में स्थायी समाधान शामिल होना चाहिए जिसके लिए एक मंत्रालयीय जनादेश है। 
        उन्होंने विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक से अनुरोध किया कि पीएसएच और कृषि विशेष सुरक्षा तंत्र के बारे में अंतिम रूप से निर्णय लेने के प्रयासों के लिए जोरदार कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया ई-कॉमर्स और निवेश सुविधा जैसे नए मुद्दों पर परिणाम प्राप्‍त करने के लिए किए जाने वाले प्रयास दोहा वार्ता के एजेंडे के लंबे समय से लंबित अन्‍य मुद्दों की कीमत पर नहीं किए जाने चाहिए।
          वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने बहुपक्षीय सुधार विषय पर अंतर्राष्ट्रीय और विकास अध्ययन के लिए ग्रेजुएट संस्थान को भी संबोधित किया। इस कार्यक्रम में 350 से अधिक राजनयिकों, विभिन्न अंतर-सरकारी संगठनों, वकीलों, शिक्षाविदों, छात्रों और मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 
      वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के एक संस्थापक सदस्य के रूप में भारत का बहुपक्षवाद का कट्टर समर्थक होने का एक लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों की स्थिति में अभी हाल में हुए परिवर्तनों ने आमतौर पर बहुपक्षीयवाद और विशेष रूप से बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को किस प्रकार प्रभावित किया है। 
            उन्होंने बहुपक्षीयवाद की भावना को पुन: मजबूत बनाने, विशेष रूप से प्रणालियों को मजबूती प्रदान करने संरक्षणवाद का मुकाबला करने और विकास को बढ़ावा देने के बारे में कई सुझाव दिए। व्यापार के लिए भारत के खुलेपन पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि वार्ता के लिए भारत का दृष्टिकोण गहरी और मजबूत प्रतिबद्धता पर आधारित है ताकि व्यापार वार्ता में विकास के मुद्दों का समाधान किया जा सके। 
           उन्होंने विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों से आग्रह किया कि वे समय के अनुरूप काम करें और बहुपक्षीय सुधार के लिए सामूहिक जिम्मेदारी लें क्‍योंकि व्यापार में वैश्विक चुनौतियों से निपटने का यही एकमात्र साधन है।
          वाणिज्य और उद्योग मंत्री के संबोधन को सबने ध्‍यान से सुना और उसके बाद दर्शकों के साथ जीवंत बातचीत हुई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने दक्षिण केंद्र का भी दौरा किया जो विकासशील देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है और वे अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में अपने साझा हितों को बढ़ावा देने के प्रयासों और विशेषज्ञता को जोड़ने में मदद करता है। 
          उन्‍होंने दक्षिण केंद्र से विकासशील देशों के मध्‍य वार्ता के लिए सहयोग निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को जारी रखने का आग्रह किया ताकि वे विश्व व्यापार संगठन में अपने देय हितों से वंचित न हों। वार्ता में शामिल प्रतिभागियों में प्रमुख विकासशील सदस्य देशों के राजदूत भी शामिल थे। एम सी 11 के परिणामों में उनके दृष्टिकोणों लाभदायक विचारों का आदान-प्रदान हुआ। 
         श्रीमती सीतारमण ने विभिन्न विश्व व्यापार संगठन वार्ता के भविष्‍य एमसी 11 के संभावित परिणामों के बारे में चुनिंदा राजदूतों और विभिन्‍न विश्व व्यापार संगठन वार्ता समूह के अध्यक्षों के साथ मिलकर एक बैठक का भी आयोजन किया। 
         इस बैठक में प्रतिभागियों में विश्व व्यापार संगठन की वार्ताओं के विभिन्‍न पहलुओं पर अपने विचार और दृष्टिकोण साझा किए। बातचीत के दौरान साझा स्थिति और रूख की पहचान की गई। अपनी जिनेवा की उनकी यात्रा के दौरान श्रीमती सीतारमण ने अंकटाड के महासचिव और अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार केंद्र के कार्यकारी निदेशक के साथ भी बातचीत की। इन बैठकों के दौरान इन संस्‍थाओं की भारत के साथ और उसकी ओर से की जा रही गतिविधियों की सराहना की और गतिविधियों को और आगे बढ़ाने का सुझाव दिया।

Wednesday, 19 July 2017

कनाडा का कोकिंग कोल निर्यात प्रतिवर्ष लगभग 30 मिलियन टन

       केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में इस्पात मंत्रालय और उसके सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस महीने के शुरू में कनाडा का दौरान किया। उन्‍होंने कनाडा सरकार के प्राकृतिक संसाधन मंत्री जेम्स कैर के साथ व्यापक रूप से विचार-विमर्श किया। 

    चर्चा में भारत में इस्पात उद्योग की प्रगति, भारतीय इस्पात निर्माताओं के लिए कनाडा कोकिंग कोल का रणनीतिक महत्‍व, पर्यावरणीय अनुकूल खनन के क्षेत्र में सहयोग, कोयला परिष्‍करण और अनुसंधान एवं विकास आदि विषय शामिल रहें। भारत में स्टील बनाने की क्षमता में वृद्धि के साथ तालमेल स्‍थापित करने के लिए कनाडा से कोकिंग कोल का आयात बढ़ाने की जरूरत होगी। 
          यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 के उत्पादन लक्ष्यों के अनुसार कोकिंग कोल की आवश्यकता जो वर्तमान में 60 मिलियन टन प्रतिवर्ष के स्‍तर पर है उसका बढ़कर 160 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक होने का अनुमान है। हालांकि स्वदेशी कोकिंग कोल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए विभिन्‍न प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन आयातित कोकिंग कोल पर भारत की निर्भरता जारी रहेगी। ऐसे परिदृश्य में कोकिंग कोल आयात के स्रोत के लिए बहुविकल्प होने से मूल्‍यों में लाभ प्राप्‍त होंगे। 
          इस दौरे में कनाडा के इस्पात निर्माण संस्थान के (सीआईएससी) के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श हुआ। यह एक विशिष्‍ट संस्थान है जो अपने आपको को इस्‍पात निर्माण उद्योग के लिए कनाडा की आवाज घोषित करता है। बीरेंद्र सिंह ने भारत में इसी तरह का संस्थान स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने के उद्देश्य से इस संस्थान के कार्य और ढांचे में गहरी रूचि व्यक्त की। सीआईएससी उद्योग हितधारकों में वार्ता, सहयोग और वाणिज्य को बढ़ावा देता है और इस्‍पात के लाभ परामर्श समुदाय, निर्माताओं, खरीदारों, शिक्षाविदों और सरकार को प्रदान करता है।
        सीआईएससी इस्‍पात निर्माताओं, फैब्रिकेटर्स, कन्स्ट्रक्टरों, इंजीनियरों, वास्तुकारों, मालिकों, डेवलपर्स, शिक्षकों और छात्रों के विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है और क्षमता तथा व्यवसाय को बढ़ाने के लिए अनेक उत्पाद और सेवाएं उपलब्‍ध कराता है। इस प्रतिनिधिमंडल ने आपसी हितों के मुद्दों पर बातचीत करने के लिए इस्‍पात से जुड़े विभिन्न कनाडाई संस्थानों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ टोरंटो में एक संयुक्त बैठक का आयोजन किया। 
         इस बैठक में कुशल खनन, लॉजिस्टिक प्रबंधन और भारतीय अर्थव्यवस्था की इस्पात तीव्रता को बढ़ाना, इस्पात निर्माण में अनुसंधान और विकास तथा निर्माण के लिए पसंदीदा सामग्री के रूप में इस्‍पात को बढ़ावा देने वाले विषय शामिल रहे। 
         इस सम्मेलन में संस्थान कनाडाई इस्पात प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, कनाडा की कोयला एसोसिएशन और कनाडा शीर्ष उद्योगों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्‍या में भाग लिया। इससे पहले इस प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटिश कोलंबिया राज्य में एक कोकिंग कोलमाइन का दौरा किया और इसके संचालन कार्य को देखा। 
        कनाडा प्रतिवर्ष लगभग 30 मिलियन टन कोकिंग कोल का निर्यात करता है जिसमें से भारतीय इस्पात कंपनियां लगभग तीन मिलियन टन कोकिंग कोल खरीदती हैं।