Monday, 26 June 2017

भारतीय बुनाई एवं अन्य टेक्सटाइल ऑस्ट्रेलिया को भायी,सहयोग-संवाद

          प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार और विदेश कार्य एवं व्यापार विभाग, ऑस्ट्रेलिया के बीच कपड़ा, वस्त्र और फैशन के क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू को मंजूरी दी। 

       यह एमओयू भागीदारों के आपसी हितों और लाभों के क्षेत्रों में कपड़ा एवं फैशन के मामलों में संबंध में समन्वय बढ़ाएगा। दोनों प्रतिभागी ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय कपड़ा और फैशन क्षेत्रों के बीच संपर्क बनाने के लिए संयुक्त रूप से उचित उपायों की पहचान, उन पहचाने गए क्षेत्रों में सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय संवाद को प्रोत्साहित, उन क्षेत्रों के बीच कौशलों एवं प्रतिभाओं का पोषण, आर्थिक अवसरों एवं व्यावसायिक संवाद को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण, कौशल विकास और दोनों देशों में उन क्षेत्रों से उत्पन्न उत्पादों की सार्वजनिक प्रदर्शनी का आयोजन संयुक्त रूप से करेंगें। 
        इस एमओयू के अंतर्गत उठाए गए कदमों से सहायक कामगारों सहित बुनकरों को लाभ प्राप्त होगा। हैंडलूम क्षेत्र के संपूर्ण विकास के लिए इस पहल का उद्देश्य बाजार संपर्क स्थापित करके हैंडलूम फैब्रिक उत्पादन में सुधार करना, डिजाइन क्षमता में सुधार के लिए डिजाइनों एवं तकनीकों में नवाचार को प्रोत्साहित करना, उत्पादों का विविध उपयोग एवं मूल्य संवर्धन, घरेलू एवं निर्यात बाजारों तक बेहतर पहुंच जिससे कि बुनकरों को निरन्तर रोजगार प्राप्त हो सके और उनके जीवन जीने के स्तर में सुधार हो सके। 
        वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार हैंडलूम क्षेत्र में विभिन्न नवाचारों को लागू करके इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए उत्तरदायी है। युवा पीढ़ी के बीच हैंडलूम उत्पादों को लोकप्रिय बनाना मंत्रालय का प्रयास रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बाजारों के लिए भारतीय बुनाई एवं अन्य टेक्सटाइलों का उपयोग करते हुए कपड़ों का उत्पादन करने वाले ऑस्ट्रेलियाई फैशन डिजाइनरों नें भारत में विभिन्न हितधारकों के साथ काम करने की रूचि प्रदर्शित की है जिसमें टेक्सटाइल और हैंडलूम के अत्याधुनिक डिजाइनिंग और उन्हें भारतीय बाजारों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बेचना भी शामिल है।
         विदेश कार्य एवं व्यापार विभाग (ऑस्ट्रेलिया सरकार) ने इस संबंध में भारत सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव रखा था।

 

Friday, 23 June 2017

जल संसाधन प्रबंधन के लिए नीदरलैंड व भारत के बीच समझौता को मंजूरी

        प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल संसाधन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय और नीदरलैंड्स के अवसंरचना और पर्यावरण मंत्रालय के बीच समझौता (एमओयू) को मंजूरी दी है। 

       इस समझौते में यह परिकल्पना की गई है कि दोनों देश की सरकारें जल संसाधनों के कुशल उपयोग, नदी बेसिन प्रबंधन, निर्णय समर्थन प्रणालियों, डेल्टा प्रबंधन, जल गुणवत्ता संबंधी मुद्दे और नवाचारी रियायत प्रबंधनों के माध्यम से अपशिष्ट जल रिसाइक्लिंग और पुन: प्रयोग सहित आपसी रूप से सहमत क्षेत्रों में सहभागिता तथा अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करके जल संसाधन प्रबंधन एवं विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में कार्य करेंगी। 
            समझौता के अंतर्गत सहयोग में अध्ययन दौरों, संगोष्ठियों, सम्मेलनों एवं दोनों देशों के विशेषज्ञों की बैठकों, क्षमता निर्माण कार्यक्रम-प्रशिक्षण के संयुक्त अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देकर, अकादमिक एवं संबंधित अनुसंधान और प्रशिक्षण के उद्देश्य के लिए प्रशिक्षण समूह एवं अन्य गतिविधियों के लिए आदान-प्रदान, सहयोगात्मक परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों में आपसी भागीदारी को प्रोत्साहित और या शुरू करना, सार्वजनिक निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के माध्यम से ज्ञान और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना शामिल होगा। 
             समझौता को पूरा करने के लिए की जाने वाली कार्यकलापों की निगरानी करने के लिए एक संयुक्त कार्य दल का भी गठन किया जाएगा। द्विपक्षीय सहयोग देश को नदी बेसिन प्रबंधन, गंगा सहित नदियों के प्रदूषण में उपशमन, बाढ़ प्रबंधन, जल गुणवत्ता और जल के कुशल उपयोग के क्षेत्र में जल संसाधनों के क्षेत्र में कार्य करने वाली केंद्र एवं राज्य सरकारों की एजेंसियों की संस्थानिक और तकनीकी क्षमता बढ़ाने में लाभ प्रदान करेगा। 
             जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय नीति और तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करके, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के संचालन, कार्यशालाओं, वैज्ञानिक एवं तकनीकी परिसंवादों, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, अध्ययन दौरा आदि के माध्यम से जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय सहयोग पर विचार कर रहा है।
           नदी बेसिन प्रबंधन नियोजन-एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन प्रदूषण उपशमन, निर्णय समर्थन प्रणालियां, डेल्टा प्रबंधन, जल गुणवत्ता, अपशिष्ट जल रीसाइक्लिंग और पुनः प्रयोग आदि में नीदरलैंड की सफलता को ध्यान में रखते हुए नीदरलैंड के साथ करार करने का यह निर्णय लिया गया है जिससे कि उनके अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सके।

भारत और श्रीलंका के बीच होम्योपैथी में सहयोग के लिए समझौते को मंजूरी

           प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और श्रीलंका की लोकतांत्रिक, समाजवादी एवं गणतांत्रिक सरकार के स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वदेशी चिकित्सा मंत्रालय के बीच चिकित्सा एवं होम्योपैथी की परंपरागत प्रणालियों में सहयोग के लिए समझौतो ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए अपनी सहमति प्रदान की है। 

        इस प्रस्तावित एमओयू पर हस्ताक्षर होने से परंपरागत चिकित्सा और होम्योपैथी के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ेगा। यह दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
         इसमें अतिरिक्त वित्तीय बाधाएं शामिल नहीं हैं। अनुसंधान, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, सम्मेलनों-बैठकों के संचालन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों को आयुष मंत्रालय के विद्यमान आबंटित बजट एवं विद्यमान योजनाओं से पूरा किया जाएगा। 
            दोनों देशों द्वारा सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर होने के तुरंत पश्चात्, दोनों देशों की तरफ से कार्यक्रम शुरु कर दिए जाएंगे। दोनों देशों के बीच शुरू की गई पहलें हस्ताक्षर किए गए एमओयू की शर्तों के अनुसार होगी और यह एमओयू के संचालनात्मक रहने तक निरंतर प्रक्रिया रहेगी। भारत चिकित्सकीय पौधों सहित परंपरागत चिकित्सा की सुविकसित प्रणाली से संपन्न देश है, जो वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में अभूतपूर्व संभावना रखता है।
          परंपरागत चिकित्सा प्रणाली के क्षेत्र में श्रीलंका का भी सुदीर्घ इतिहास है। आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी, योग एवं नेचुरोपैथी एवं होम्योपैथी श्रीलंका में स्वास्थ्य देखभाल की विद्यमान महत्वपूर्ण परंपरागत प्रणालियां हैं। आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में दोनों देश साझा संस्कृति रखते हैं। इसके अलावा, दोनों देशों में विशेष रूप से उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाने वाले अनेक चिकित्सकीय पौधे हैं जो दोनों देशों की एक समान भौगोलिक-जलवायु कारकों के कारण एक समान हैं। 
            भारत और श्रीलंका में अनेक साझा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, भाषाई और साहित्यिक समानताएं विद्यमान हैं। दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक और सभ्यता की विरासत और दोनों देशों के नागरिकों के बीच विस्तृत जनसंवाद दोनों देशों के बीच बहुत सक्रिय भागीदारी और सौहार्द्रपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का निर्माण करने के लिए सुदृढ़ आधार प्रदान करती हैं। 
            आयुष मंत्रालय ने चिकित्सा की भारतीय प्रणालियों को वैश्विक रूप से प्रचारित करने के अपने अधिदेश के एक भाग के रूप में 11 देशों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करके प्रभावी कदम उठाए हैं।
           इसमें परंपरागत चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग के लिए चीन गणराज्य का परंपरागत चीनी चिकित्सा राज्य प्रशासन (एसएटीसीएम), मलेशिया सरकार, त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय,  हंगरी सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय, बांग्लादेश गणराज्य का परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय, नेपाल सरकार का स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय, मॉरिशस सरकार का स्वास्थ्य एवं गुणवत्ता पूर्ण जीवन मंत्रालय, मंगोलिया सरकार का स्वास्थ्य एवं खेलकूद मंत्रालय, तुर्कमेनिस्तान सरकार का स्वास्थ्य एवं चिकित्सा उद्योग मंत्रालय, मयांमार सरकार का स्वास्थ्य एवं खेलकूद मंत्रालय, जर्मनी संघीय गणराज्य के संघीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ संयुक्त घोषणा शामिल हैं।

Wednesday, 21 June 2017

अमरीका के सम्‍मेलन में भारतीय पवेलियन, जैव अर्थव्‍यवस्‍था 42 अरब डॉलर

           विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्‍वी विज्ञान राज्‍य मंत्री वाई.एस. चौधरी ने सान डिएगो में जैव प्रौद्योगिकी नवाचार संगठन (बीआईओ) के अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में भारतीय पवेलियन का उद्घाटन किया। 

         भारतीय पवेलियन की विषय वस्‍तु में ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर दिया गया है। चौधरी ने पवेलियन का उद्धाटन करने हुए कहा कि बीआईओ के दौरान हुए सकारात्‍मक विचार विमर्श से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय स्‍टार्ट अप कंपनियों के लिए अनेक नये अवसर खुलेंगे और भारतीय जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतर्राष्‍ट्रीय साझेदारों का विश्‍वास बढ़ेगा। भारतीय पवेलियन में 30 से अधिक स्‍टार्ट अप कंपनियां, राज्‍य सरकारें, बायो टैक पार्क और अनुसंधान संस्‍थानों को प्रदर्शित किया गया है। 
        बीआईओ ने 60 से अधिक देशों के 15000 प्रतिनिधियों को आकर्षित किया है और एक ही स्‍थान पर वैश्विक अवसर प्रदान किये हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्‍य मंत्री ने 60 पृष्‍ठों की एक ‘इंडिया बायोटैक हैंडबुक 2017’ जारी की, इसमें भारत की 42 अरब डॉलर की तेजी से बढ़ती जैव अर्थव्‍यवस्‍था की ताकत को दर्शाया गया है।

Tuesday, 20 June 2017

भारत व पुर्तगाल के बीच अभिलेखागार सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समझौता

     भारत व पुर्तगाल ने अभिलेखागार सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते पर पुर्तगाल की राजधानी लिसबन में भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार और पुर्तगाल गणराज्य के संस्कृति मंत्रालय के बीच 17 मई, 2017 को हस्ताक्षर किए गए।

      समझौते के अंतर्गत पहले कदम के रूप में टौरे दो तोम्बो (नेशनल आर्काइव्स ऑफ पुर्तगाल) ने ‘मोनकॉस दो रीनो’(मॉनसून कॉरस्पान्डन्स) नाम से संग्रह के 62 संस्करणों की डिजिटल प्रतियां राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंपी। ये संस्करण मूल रूप से 1568 से 1914 तक की अवधि तक के 456 संस्करणों का हिस्सा रहे हैं। यह गोवा स्टेट आर्काइव्स के सभी रिकॉर्ड संग्रहों में सबसे बड़ा है। संग्रह में लिसबन से गोवा की सीधा लिखा-पढ़ी को शामिल किया गया है और यह एशिया में पुर्तगाली विस्तार, अरबों के साथ उनके व्यापारिक विरोधियों और यूरोपीय शक्तियों तथा दक्षिण एशिया और पूर्व एशिया में पड़ोसी राजाओं के साथ उनके संबंधों के अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत है। 
       1605 से 1651 की अवधि के बीच की घटनाओं से जुड़े 12,000 दस्तावेजों वाले इन 62 संस्करणों को 1777 में, गोवा से लिसबन भेज दिया गया था जहां इन्हें ‘डॉक्यूमेंटोस रेमेटीदोस दा इंडिया’(भारत से भेजे गए दस्तावेज) शीर्षक से 1880 और 1893 के बीच लिसबन में एकेडमी ऑफ साइंस द्वारा प्रकाशित किया गया। 
          मौलिक संस्करण हमेशा लिसबन में रहे हैं। 240 वर्ष बाद गोवा स्टेट आर्काइव्स के संग्रह की श्रृंखलाओं में इस खाई को तब पाटा गया जब 17 मई, 2017 को एक समारोह में पुर्तगाल में भारत की राजदूत के.नंदिनी. सिंगला, सांस्कृतिक समझौता और सहयोग कार्यक्रम इकाई की चीफ ऑफ डिविजन सुश्री टेरेसा आर्टिलहीरो फेरेरा, पुर्तगाल के पुस्तकालय, अभिलेखागार और पुस्तक महानिदेशक, डॉ. एल्मीडा लेसर्दा ने ‘मोनकॉस दो रीनो’ के लापता संस्करणों की डिजिटल इमेज का एक सेट भारत के अभिलेखागार महानिदेशक राघवेंद्र सिंह को सौंपा जिनके नेतृत्व में दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 15-17 मई, 2017 तक पुर्तगाल की यात्रा पर था।
          इस अवसर पर सिंह ने पुर्तगाल और भारत में अभिलेखागार बिरादरी के साथ निकट सहयोग कायम करने के लिए कार्य करने की इच्छा व्यक्त की ताकि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों को बेहतर बनाया जा सके। पुर्तगाल में भारत की राजदूत ने कहा कि पुर्तगाली प्रधानमंत्री की इस वर्ष भारत की सफल यात्रा के बाद दोनों देश टेक्नोलॉजी से शिक्षा और नागर विमानन से फुटबाल तक विभिन्न क्षेत्रों में मिल सहयोग स्थापित कर सकेंगे। संस्कृति हमारे लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण अंग है और इस क्षेत्र में सहयोग सभी को अच्छा लगेगा। 



 

Friday, 16 June 2017

प्रधानमंत्री ने आयरलैंड के ताओसीच के रूप में कार्यभार संभालने पर लियो वराडकर को बधाई दी


         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने महामहिम लियो वराडकर को आयरलैंड के ताओसीच के रूप में कार्यभार संभालने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आयरलैंड के ताओसीच के रूप में अपना कार्यभार संभालने के लिए महामहिम लियो वराडकर को बधाई। 
          मैं भारत-आयरलैंड संबंधों को आगे और मजबूत करने के लिए ताओसीच वराडकर के साथ काम करने की आशा करता हूं।'

कोरिया एशिया व अन्य देशों के लिए लाभदायक

          केंद्रीय वित्त, कार्पोरेट व रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम मून जई इन से मुलाकात की। 

   वित्त मंत्री अरूण जेटली ने राष्ट्रपति मून को हाल ही में हुए चुनाव मे विजय प्राप्त करने पर बधाई दी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं व्यक्त की। जेटली ने मून के क्षेत्र के प्रति उनके दृष्टिकोण और भारत के साथ संबंधों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत दौरे के निमंत्रण का पुनः स्मरण कराते हुए आशा व्यक्त कि दोनो नेताओँ के बीच शीघ्र ही भेंट होगी। कोरिया मे जेटली का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति मून ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चुनाव में विजय प्राप्त करने के लिए उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।
              मून ने विशेष तौर पर ट्विटर में कोरियाई भाषा मे संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का स्मरण किया। 11 मई को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बधाई संदेश देने के लिए किये फोन का स्मरण करते हुए मून ने कहा कि दोनो पक्षों में द्विपक्षीय भागीदारी के निर्माण के लिए प्रबल इच्छा शक्ति है।
             उन्होने कहा कि हाल ही मे चुने गए कोरिया के राष्ट्रपति द्वारा भारत के लिए विशेष दूत की नियुक्ति करने का निर्णय कोरिया के भारत के साथ संबंधो के प्रति  सशक्त प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस निर्णय की सराहना के संदेश के बारे में बताए हुए कहा कि इस प्रकार की शुरूआत भारत के पूर्व की ओर देखो नीति के अनुरूप है। 
            उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरार्राष्ट्रीय संबंधो में उद्यत कोरिया एशिया और अन्य देशों के लिए लाभदायक है। वित्तमंत्री ने राष्ट्रपति मून को हितकारी बैठकों के संबंध में जानकारी दी। जेटली ने दोनो देशों के बीच रक्षा उद्योग,आधारभूत ढांचे में निवेश और उत्पादन में भागीदारी के लिए दोनों देशों विशाल अवसरो के बारे में बताया। 
          राष्ट्रपति मून ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्तमंत्री जेटली के नेतृत्व में ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की सराहना कि और कहा की उन्हें विश्वास है कि भारत शीघ्र ही विशाल आर्थिक शक्ति बनने के पथ पर अग्रसर है।

        उन्होंने कोरिया में भारत के उच्च कुशल योग्य पेशेवर की सराहना की। इससे पहले वित्त मंत्री अरूष जेटली ने प्रमुख कोरियाई कंपनियों के अध्यक्षों,प्रबंध निदेशको और मुख्य कार्यकारी अधिकारियो से मुलाकात की।