Thursday, 21 September 2017

म्‍यांमार नौसेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल तिन आंग सैन भारत में

     नई दिल्ली। म्‍यांमार नौसेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल तिन आंग सैन वर्तमान समय में भारत के दौरे पर हैं।

    इस यात्रा का उद्देश्‍य भारत और म्‍यांमार के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ एवं व्‍यापक बनाना है। एडमिरल ने नई दिल्ली में अपने आगमन से पहले ही तय किये जा चुके कार्यक्रम के तहत मुंबई और कोच्चि स्थित विभिन्‍न नौसेना प्रतिष्‍ठानों का दौरा किया। श्री सैन नई दिल्‍ली में नौसेना प्रमुख, थल सेना प्रमुख और वायु सेना प्रमुख से भेंट करेंगे। 
       एडमिरल इसके अलावा नई दिल्‍ली में रक्षा मंत्रालय के विभिन्‍न गणमान्‍य व्‍यक्ति से विचार-विमर्श करेंगे। भारत और म्‍यांमार के बीच नौसेना क्षेत्र में सहयोग पारंपरिक रूप से काफी सुदृढ़ रह है जिनमें समन्‍वित मौखिक अभिव्यक्ति के जरिए परिचालनात्‍मक परिचर्चाएं, प्रशिक्षण, पोर्ट कॉल, क्षमता निर्माण के साथ मार्ग संबंधी अ‍भ्‍यास और क्षमता वृद्धि पहल शामिल हैं। 
     प्रधानमंत्री द्वारा सितम्‍बर 2017 के आरंभ में की गई म्‍यांमार यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच नौवहन सहयोग के क्षेत्र में तीन सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किये गये थे। इसी तरह अगस्‍त 2017 में म्‍यांमार रक्षा बलों के कमांडर इन चीफ की हालिया यात्रा के कुछ ही समय बाद एडमिरल का यह दौरा हुआ है। यह यात्रा दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।

Tuesday, 19 September 2017

सिंगापुर पूर्वोत्तर भारत में कौशल विकास केन्‍द्र का निर्माण करेगा

     नई दिल्ली। सिंगापुर सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र की आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रखते हुए गुवाहाटी में कौशल विकास केन्‍द्र का निर्माण करेगा। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन तथा अंतरिक्ष व परमाणु ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने सिंगापुर के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। 

    प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्‍व सिंगापुर के उच्‍चायुक्‍त लिम थूअन कुअन कर रहे थे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे जिसका नेतृत्‍व डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने किया। 
    सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल ने उक्‍त तीनों क्षेत्रों में सहयोग की इच्‍छा जताई। गुवाहाटी में कौशल विकास केन्‍द्र की स्‍थापना को लेकर सिंगापुर और असम की सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पहले ही तैयार किया जा चुका है। कौशल विकास केन्‍द्र का निर्माण कार्य 2019 तक पूरे होने की संभावना है। 
     पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय इस पहल का संयोजन करेगा। सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में सहयोग की अपनी इच्‍छा जताई। सिंगापुर ने बाह्य अंतरिक्ष के शान्तिपूर्ण उपयोग की अपनी इच्‍छा जताई।
    इस संबंध में डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि इस मामले को उचित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। सिंगापुर प्रतिनिधिमंडल कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन के क्षेत्र में भारत के अनुभव और विशेषज्ञता की साझेदारी चाहता है ताकि वह अपने देश में लोक प्रशासन के क्षेत्र में मूल्‍यवर्धन कर सके।
     डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि लाल बहादुर शास्‍त्री राष्‍ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) और सिंगापुर के बीच पहले से ही एक समझौता है जिसके तहत प्रशासनिक अधिकारी/आईएएस अधिकारी सिंगापुर की यात्रा करते हैं।
      डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि भारत और सिंगापुर एक-दूसरे के प्रति डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत और सिंगापुर हमेशा एक-दूसरे के प्रति अनुकूल रवैया रखते हैं। डॉ. सिंह ने सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्‍होंने नीति आयोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बहुत प्रभावशाली व्‍याख्‍यान दिया था।

Tuesday, 12 September 2017

अफगानिस्‍तान के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्‍बानी ने प्रधानमंत्री से की मुलाकात

      नई दिल्‍ली। अफगानिस्‍तान के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्‍बानी ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अफगानिस्‍तान के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्‍च प्राथमिकता देता है।

   प्रधानमंत्री ने अफगानिस्‍तान और वहां के लोगों पर थोपे गए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अफगानिस्‍तान को अपने समर्थन को दोहराया। उन्‍होंने अफगानिस्‍तान सरकार और वहां के लोगों को शांतिपूर्ण, संयुक्‍त, लोकतांत्रिक एवं समृद्ध राष्‍ट्र के निर्माण में उनके प्रयासों के प्रति भारत का पूर्ण समर्पण एवं मानवीय आधार पर विकास के लिए सहायता प्रदान करने की अपनी वचनबद्धता को दोहराया।
      विदेश मंत्री रब्‍बानी ने अफग़ान की स्थिति के बारे में प्रधानमंत्री को अवगत कराया। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि अफग़ान शांति प्रक्रिया में अफग़ान के नेतृत्‍व, अफग़ान पोषित और अफग़ान द्वारा नियंत्रित होनी चाहिए। विदेश मंत्री रब्‍बानी भारत-अफगानिस्‍तान रणनीतिक सहयोग परिषद की दूसरी बैठक की भारत की विदेश मंत्री के साथ सह-अध्‍यक्षता करने के लिए इस समय भारत की यात्रा पर है।

Monday, 11 September 2017

श्रीलंका के विदेशमंत्री तिलक मारापना ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

      नई दिल्ली। श्रीलंका के विदेश मामलों के मंत्री तिलक मारापना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दोपहर एक शिष्टाचार मुलाकात की।

       विदेशमंत्री तिलक मारापना भारत की तीन दिवसीय द्विपक्षीय यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री ने तिलक मारापाना को श्रीलंका के विदेश मंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी को संभालने पर बधाई दी। 
     प्रधानमंत्री ने इस साल मई में अंतरराष्ट्रीय वैशाख दिवस के अवसर पर अपनी श्रीलंका की उपयोगी यात्रा का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों के व्यापक महत्व की बात दुहरायी। दोनों देशों के बीच गहरे और व्यापक-स्तर के संबंध हैं।
       प्रधानमंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग को अधिक मजबूत और विस्तृत करने के लिए वे श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ लगातार काम करने के लिए आशान्वित हैं।

Wednesday, 30 August 2017

भारत व कनाडा के बीच संयुक्‍त डाक टिकट

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारत:कनाडा दीवाली विषय पर दो स्‍मारक डाक टिकटों का एक सैट संयुक्‍त रूप से जारी किए जाने के लिए पारस्‍परिक सहमति से अवगत कराया गया। 

     यह संयुक्‍त डाक टिकट 21 सितम्‍बर 2017 को जारी की जाएगी। इस संयुक्‍त निर्गम के लिए डाक विभाग व कनाडा पोस्‍ट के बीच एक सहमति-ज्ञापन (एमओयू) पर पहले ही हस्‍ताक्षर किए जा चुके हैं। 
    साझा मूल्‍यों यथा लोकतंत्र, बहुलवाद, सभी के लिए समानता और कानून के राज पर आधारित भारत और कनाडा के संबंध लम्‍बे समय से रहे हैं। 
   व्‍यक्ति से व्‍यक्ति मजबूत सम्‍पर्क तथा कनाडा में व्‍यापक भरतीय जन-मानस की उपस्थिति इन संबंधों को मजबूत आधार प्रदान करता है। इस संयुक्‍त डाक-टिकट के लिए दीवाली पर्व का चयन दोनों देशों के सांस्‍कृतिक परिवेश का द्योतक होने के साथ-साथ कनाडा में भारतीय जन मानस का व्‍यापक उपस्थिति का भी परिचायक है।

Thursday, 24 August 2017

एससीओ देशों में प्राकृतिक आपदाओं से 3,00,000 लोगों की मृत्‍यु

      आपात स्थिति की रोकथाम और समाप्ति पर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) देशों के सरकारों के प्रमुखों की 9वीं बैठक में किर्गिज गणराज्‍य के चोलपोन-एटा में भारत की ओर से गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा वक्‍तव्‍य दिया गया।

     भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘भारत इस 9वीं बैठक के इस शानदार आयोजन के लिए किर्गिज गणराज्‍य के राष्‍ट्रपति अलमाजबेक एतामबयेव और मंत्री बोरोनोव को हार्दिक धन्‍यवाद देता है। मुझे बताया गया है कि कल विशेषज्ञों के समूहों की बैठक दोस्‍ताना माहौल में आपातस्थिति की रोकथाम और समाप्ति के लिए व्‍यापक कार्यक्रम विकसित करने के उद्देश्‍य से हुई।
       शंघाई सहयोग संगठन के नये सदस्‍यों के रूप में हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि इस बैठक के लिए सहयोग के क्षेत्रों की पहचान समय से और उचित रूप में की गई है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 1996 से 2015 की अवधि में एससीओ देशों में प्राकृतिक आपदाओं से 3,00,000 लोगों की मृत्‍यु हुई। आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान हुआ। 
     हम प्राकृतिक और मानव निर्मित जोखिमों से घिरे हुए है। भूकंप, बाढ़, तूफान, चट्टानें खिसकने और महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बड़े पैमानों पर लोगों की मृत्‍यु होती है। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए जल और मौसम संबंधी जोखिम बढ़ने की संभावना है। यदि हम अपने समुदाय, अपनी पूंजी और अपनी आर्थिक गतिविधियों को मजबूत नहीं बनाते, तो आपदाओं से होने वाला नुकसान बढ़ता रहेगा। अपनी आर्थिक वृद्धि और अपना सतत मानव विकास सुनिश्चित करने के लिए एससीओ देशों के लिए जोखिम कम करना महत्‍वपूर्ण है। 
        गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आपस में जुड़ी दुनिया में जोखिम में कमी महज आर्थिक गतिविधि नहीं है। विश्‍व के एक हिस्‍से में हुई कार्रवाई का असर विश्‍व के दूसरे हिस्‍सों पर भी पड़ता है। दो भौगोलिक क्षेत्रों में आपदाओं का कोई सीधा सम्‍पर्क नहीं है फिर भी आपदा की रोकथाम की चुनौती विश्‍व में सबके लिए समान है। इसलिए हमें निरंतर रूप से एक-दूसरे से सीखना चाहिए, नवाचार को प्रोत्‍साहित करना चाहिए ताकि हम अपने लिए और आने वाली पीढि़यों के लिए सुरक्षित विश्‍व का निर्माण कर सकें।
       गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मानवता का लगभग 40 प्रतिशत हिस्‍सा हमारे देश में रहता है। हम तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्‍यवस्‍था हैं। यदि हम आपदाओं तथा आपात स्थितियों को रोकने और उनके प्रभावों को कम करने में सफल होंगे, तो पूरी दुनिया को इससे लाभ होगा। जब तक शंघाई सहयोग संगठन के देश आपदा जोखिम कम करने के लक्ष्‍य को प्राप्‍त नहीं करते, तब तक सेंडई रूपरेखा में शामिल लक्ष्य और सतत विकास के लक्ष्‍यों को 2030 तक हासिल नहीं किया जा सकता। 
       इसलिए हम सभी के लिए इस क्षेत्र में अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग महत्‍वपूर्ण है। हम भारत में मृत्‍यु और नुकसान को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। हम आपदाओं से होने वाली मृत्‍यु की प्रवृत्ति का विश्‍लेषण कर रहे हैं और सटीक कदम उठा रहे हैं। हम फैलीन और हुदहुद जैसे दो बड़े तूफानों से कारगर तरीके से सामना करने में सफल रहे है। यह सफलता दशकों की नीतिगत पहल, पूर्व चेतावनी क्षमता में वृद्धि, अग्रिम रूप से तैयारी, प्रशिक्षण और क्षमता विकास के कारण मिली है। 
       इन दो आपदाओं में मरने वालों की संख्‍या घटकर 45 रही, जबकि1999 में ओडिशा में आये तूफान से 10,000 लोग मरे थे। दूसरे शब्‍दों में एक दशक से थोड़ा अधिक समय में हम मृत्‍यु दर को एक प्रतिशत से भी नीचे करने में सफल रहे हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि तूफान संबंधी मृत्‍यु में कमी लाने के अतिरिक्‍त हमने अत्‍यधिक तापमान के कारण होने वाली मृत्‍यु को कम करने के लिए आवश्‍यक कदम उठाया। सभी लोगों-मौसम वैज्ञानिकों, आपदा प्रबंधकों, सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों, स्‍थानीय निकायों, निर्माणस्‍थल के प्रबंधकों, जल तथा बिजली सप्‍लाई करने वाले विभागों के साथ काम करके हमने गर्म हवाओं के बारे में चेतावनी व्‍यवस्‍थाओं में सुधार किया और यह व्‍यवस्‍था स्‍थानीय स्‍तर पर लागू की गई है। 
        इससे हमें गर्म हवाओं से मरने वाले लोगों की संख्‍या कम करने में मदद मिली है। गर्मी से 2015 में जहां 2000 लोगों की मृत्‍यु हो गई थी, वहीं 2017 में गर्म हवाओं से 250 लोग ही मरे। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भूकंप जैसी घटनाओं से मृत्‍यु जोखिम कम करना दीर्घकालिक प्रयास है, लेकिन हमने इस दिशा में शुरूआत कर दी है। सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए हमने राष्‍ट्रीय और स्‍थानीय स्‍तरों पर जोखिम दृढ़ता प्रबंधन में सुधार किया है। 2016 में लॉन्‍च की गई हमारी राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना में प्रणालीगत विषयों को शामिल किया गया है। 
     राष्‍ट्रीय योजना के अतिरिक्‍त हमारे सभी राज्‍यों और 90 प्रतिशत जिलों ने आपदा प्रबंधन योजना पूरी कर ली है। भारत मानता है कि शंघाई सहयोग संगठन के ढांचे के अंदर आपदा और आपात स्थितियों की रोकथाम पर सहयोग से हमारे घरेलू प्रयासों को बल मिलेगा। साथ-साथ भारत के उपयोगी कार्यों से एससीओ के सदस्‍य देश भी लाभांवित हो सकेंगे। सहयोग के सम्‍पूर्ण दायरे में मैं आपके विचार के लिए तीन विशेष विषयों का उल्‍लेख करना चाहूंगा। 
       गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पहला भूकंप संबंधी नुकसान को कम करने पर सहयोग है। पिछले 20 वर्षों में 2,00,000 लोग भूकंप से मरे हैं। दो तिहाई आपदा संबंधी मृत्‍यु शंघाई सहयोग संगठन देशों में होती है। भविष्‍य में नुकसान को कम करने के लिए ठोस सहयोग गतिविधियों को विकसित करना आवश्‍यक है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस संबंध में एक संयुक्‍त शहरी भूकंप खोज और बचाव अभ्‍यास हमारी सामूहिक तैयारी को सुधारने में मददगार साबित होगा। 
     संयुक्‍त अभ्‍यास से न केवल अंतर्राष्‍ट्रीय रूप से मान्‍य प्रक्रियाओं को समान रूप से समझने में मदद मिलेगी बल्कि इससे व्‍यक्तिगत परिचय और मित्रता भी होगी और यह आपदा प्रबंधन में सहायक साबित होता है। भारत 2019 में ऐसे संयुक्‍त अभ्‍यास की मेज़बानी का प्रस्‍ताव करता है। 
     गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इसके अतिरिक्‍त भूकंप को सहन करने वाले भवन निर्माण मॉडल भवन संहिता और परिपालन सुनिश्चित करने की मानक प्रक्रियाओं के बारे में ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की बैठक भी आयोजित की जा सकती है। इससे भूकंप से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए मध्‍यम और दीर्घावधि के विषयों का समाधान निकाला जा सकता है। 
       गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दूसरा, आपदा सहन करने वाली संरचना तैयार करने के लिए हम क्षेत्रीय सहयोग कर सकते हैं। आने वाले दशकों में एससीओ देशों में अवसंरचना में निवेश सतत विकास के लिए प्रेरक होगा। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि अववसंरचना आपदा प्रभाव सहन करने में सक्षम हो।
       अंत में अत्यधित तापमान के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली के क्षेत्र में भी हमें आपस में सहयोग करने की जरूरत है। एसीओ देशों का जलवायु और मौसम की स्थिति अलग- अलग हो सकती है लेकिन आपदाओं का अनुमान और पूर्व चेतावनी जारी करना सबके लिए समान है। 
     गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हम इसी संकल्प के साथ एससीओ ढांचे में काम करते रहेंगे। मैं 2019 में भारत में फोरम की अगली बैठक की मेजबानी का प्रस्ताव करता हूं।

भारतीय नौसेना बैण्ड रूस में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेना संगीत समारोह में भाग लेगा

          अंतरराष्ट्रीय सैन्य संगीत समारोह "स्पस्काया टॉवर" रूस और दुनिया के अन्य देशों के सर्वश्रेष्ठ म्यूजिक बैण्ड की ऐसी परेड है जो प्रतिवर्ष मॉस्को के लाल चौक में आयोजित की जाती है। 

     यह संगीत पर्व एक विशद आयोजन है जिसमें सैन्य संगीतकार विश्व के विभिन्न देशों की सैन्य, राष्ट्रीय और कला आधारित विविध परंपराओं का प्रदर्शन करते हैं।
     प्रति वर्ष करीब 40 देशों के 1500 से ज्यादा संगीतकार, सेनाओं से जुड़े लोग और कलाकार "स्पस्काया टॉवर" में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यह उचित ही है कि इस पर्व को रूस के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में से एक माना जाता है जिसे जन-सामान्य से शानदार समर्थन प्राप्त होता है। 
      इस वर्ष "स्पस्काया टॉवर" को 24 अगस्त से 03 सितंबर 2017 के बीच आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर भारतीय सेना के तीनों अंगों के सम्मिलित बैण्ड को इस प्रतिष्ठित आयोजन में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया गया है। 
      इस आयोजन में तीनों सेवाओं के सम्मिलित बैण्ड की भागीदारी से दोनों देशों के सैन्य बलों के संबंध तो बेहतर होंगे ही साथ ही यह भारतीय सेनाओं के बैण्ड की पेशेवर कुशलता का भी द्योतक है। तीनों सेनाओं के इस सम्मिलित बैण्ड में 07 अधिकारी और 55 पीबीओआर शामिल हैं।
      बैण्ड की नौसेना टुकड़ी के 01 अधिकारी और 09 संगीत नाविकों के दल का नेतृत्व पूर्वी नौसेना कमाण्ड के कमाण्ड म्यूजिशियन ऑफिसर कमाण्डर सतीश के चैंपियन कर रहे हैं। तीनों सेनाओं का यह सम्मिलित बैण्ड 23 अगस्त को नई दिल्ली से मॉस्को के लिये रवाना हुआ।