Thursday, 24 August 2017

भारतीय नौसेना बैण्ड रूस में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेना संगीत समारोह में भाग लेगा

          अंतरराष्ट्रीय सैन्य संगीत समारोह "स्पस्काया टॉवर" रूस और दुनिया के अन्य देशों के सर्वश्रेष्ठ म्यूजिक बैण्ड की ऐसी परेड है जो प्रतिवर्ष मॉस्को के लाल चौक में आयोजित की जाती है। 

     यह संगीत पर्व एक विशद आयोजन है जिसमें सैन्य संगीतकार विश्व के विभिन्न देशों की सैन्य, राष्ट्रीय और कला आधारित विविध परंपराओं का प्रदर्शन करते हैं।
     प्रति वर्ष करीब 40 देशों के 1500 से ज्यादा संगीतकार, सेनाओं से जुड़े लोग और कलाकार "स्पस्काया टॉवर" में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यह उचित ही है कि इस पर्व को रूस के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में से एक माना जाता है जिसे जन-सामान्य से शानदार समर्थन प्राप्त होता है। 
      इस वर्ष "स्पस्काया टॉवर" को 24 अगस्त से 03 सितंबर 2017 के बीच आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर भारतीय सेना के तीनों अंगों के सम्मिलित बैण्ड को इस प्रतिष्ठित आयोजन में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया गया है। 
      इस आयोजन में तीनों सेवाओं के सम्मिलित बैण्ड की भागीदारी से दोनों देशों के सैन्य बलों के संबंध तो बेहतर होंगे ही साथ ही यह भारतीय सेनाओं के बैण्ड की पेशेवर कुशलता का भी द्योतक है। तीनों सेनाओं के इस सम्मिलित बैण्ड में 07 अधिकारी और 55 पीबीओआर शामिल हैं।
      बैण्ड की नौसेना टुकड़ी के 01 अधिकारी और 09 संगीत नाविकों के दल का नेतृत्व पूर्वी नौसेना कमाण्ड के कमाण्ड म्यूजिशियन ऑफिसर कमाण्डर सतीश के चैंपियन कर रहे हैं। तीनों सेनाओं का यह सम्मिलित बैण्ड 23 अगस्त को नई दिल्ली से मॉस्को के लिये रवाना हुआ।

तस्‍करी की रोकथाम के लिए भारत और नेपाल के बीच समझौता

        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नारकोटिक ड्रग्स एवं साइकोट्रोपिक पदार्थ और अग्रगामी रसायन एवं संबंधित मामलों में ड्रग की मांग घटाने एवं अवैध तस्‍करी की रोकथाम पर भारत और नेपाल के बीच समझौता को मंजूरी दी। 

     यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच ड्रग मामलों पर सहयोग के क्षेत्रों को सूचीबद्ध करता है। साथ ही यह दोनों देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक ढांचा और सक्षम अधिकारियों को भी इंगित करता है जो इस एमओयू के कार्यान्‍वयन एवं किसी भी सूचना के आदान-प्रदान के लिए जिम्‍मेदार होंगे। 
    ड्रग मामलों में सहयोग से दोनों देशों के बीच नारकोटिक ड्रग्स, साइकोट्रोपिक पदार्थ और अग्रगामी रसायनों की अवैध तस्‍करी पर रोक लगने की उम्‍मीद है। इस एमओयू के तहत दोनों पक्षों को नि‍म्‍नलिखित प्रयास करने होंगे, नारकोटिक ड्रग्स, साइकोट्रोपिक पदार्थ और उनके अग्रगामी रसायनों में अवैध तस्‍करी के मुद्दे को प्रभावी तरीके से निपटाने के मद्देनजर आपसी सहयोग विकसित करना और रोकथाम, जागरूकता, शिक्षा एवं समुदाय आधारित कार्यक्रमों, उपचार एवं पुनर्वास के माध्‍यम से ड्रग की मांग घटाने में सहयोग करना। 
      नशीली दवाओं के मामलों में परिचालन, तकनीकी एवं सामान्‍य प्रकृति की सूचनाओं का आदान-प्रदान करना। साथ ही, मौजूदा कानूनों, नियमों, प्रक्रियाओं, सर्वोत्तम प्रथाओं और नारकोटिक ड्रग्स, साइकोट्रोपिक पदार्थ एवं उनके अग्रगामी रसायनों में अवैध तस्‍करी की रोकथाम के तरीकों एवं मौजूदा कानून में किसी भी संशोधन के दस्‍तावेजों का आदान-प्रदान करना।
      भारत ने मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम के लिए वैश्विक प्रयासों का हमेशा समर्थन किया है। वह इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के नेतृत्‍व में चलाए गए कई द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय अभियानों में एक पार्टी रहा है। नारकोटिक ड्रग्स पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनों की भावना के अनुसार पड़ोसी देशों एवं हमारे देश में नशीली दवाओं की स्थिति पर प्रत्‍यक्ष प्रभाव डालने वाले देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते/एमओयू करने की कोशिश की गई है। 
      कई देशों के साथ इस प्रकार के द्विपक्षीय समझौतों/एमओयू को पहले से ही अंजाम दिया गया है। नेपाल के साथ प्रस्तावित समझौता इसी तरह का एक अन्‍य समझौता है जो नशीली दवाओं के मामलों में द्विपक्षीय सहयोग के उद्देश्‍य से किया गया है।

Wednesday, 23 August 2017

भारत-नेपाल सीमा पर मेची नदी पर एक नये पुल के निर्माण के लिए समझौता

     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने भारत-नेपाल सीमा पर मेची नदी पर एक नये पुल का निर्माण शुरू करने के लिए लागत में साझेदारी, कार्यक्रम और सुरक्षा संबंधी मुद्दे पर कार्यान्‍वयन की व्‍यवस्‍था करने को लेकर भारत और नेपाल के बीच एक समझौता पर हस्‍ताक्षर किए जाने को अपनी मंजूरी दे दी है।

     इस पुल के निर्माण की अनु‍मानित लागत 158.65 करोड़ रुपये है, जिसे एशियाई विकास बैंक से प्राप्‍त ऋण द्वारा भारत सरकार की ओर से उपलब्‍ध कराया जाएगा। यह नया पुल काकरविट्टा (नेपाल) से पानीटंकी बाईपास (भारत) तक राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 327बी की 1500 मीटर लम्‍बाई के उन्‍नयन कार्य का हिस्‍सा है। जिसमें 825 मीटर लंबा छह लेन वाला सम्‍पर्क मार्ग शामिल है। मेची पुल भारत में एशियाई राजमार्ग 02 का अंतिम बिंदु है, जो नेपाल की ओर जाता है। नेपाल के साथ महत्‍वपूर्ण सम्‍पर्क कायम करता है।
      इस पुल के निर्माण से क्षेत्रीय सम्‍पर्क में सुधार होगा। दोनों देशों के बीच सीमा के आर-पार व्‍यापार में वृद्धि होगी। औद्योगिक, सामाजिक और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान मजबूत होने से अच्‍छे संबंध कायम होंगे। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अधीन राष्‍ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी विकास निगम (एनएचआईडीसीएल) को इस परियोजना के लिए एक कार्यान्‍वयन एजेंसी के रूप में निर्धारित किया गया है। 
      इस परियोजना के लिए विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है। नेपाल सरकार के संपर्क से पुल के सामंजस्‍य को अंतिम रूप दिया गया है।

गृह मंत्री की किरगिज गणराज्य की यात्रा

     केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह 24-25 अगस्त, 2017 को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों राज्यों के सरकार के प्रमुखों की 9वीं बैठक में शामिल होने के लिए किरगीज जा रहे है।

      गृह मंत्री के साथ एक शिष्टमंडल भी जा रहा है। इस बैठक में आपात स्थितियों की रोकथाम और समाप्ति पर विचार किया जाएगा। भारतीय शिष्टमंडल में गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी हैं। भारत को एससीओ की पूर्ण सदस्यता इस वर्ष मिली और जून, 2017 में कजाखस्तान के अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संघठन की वार्षिक शिखर बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शामिल हुए थे। एससीओ सदस्य के रूप में भारत की भागीदारी से एससीओ के ढांचे में अंतर्गत आबादी और भू-भाग की सुरक्षा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विकास को गति देने का अवसर मिलेगा।
        इससे क्षेत्रीय और वैश्विक प्रारूप में गुणात्मक रूप से नई स्थिति बनेगी।शंघाई सहयोग संगठन के सरकारों के प्रमुखों की बैठक में आपात स्थितियों को समाप्त करने में सदस्यों देशों की सरकारों के बीच हुए समझौते को लागू करने के लिए 2018-19 की कार्य योजना के प्रारूप पर विचार किया जाएगा और इसको मंजूरी दी जाएगी। अपनी यात्रा के दौरान गृह मंत्री कुछ एससीओ सदस्यों देशों के मंत्रियों से द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

Thursday, 17 August 2017

विश्‍व बैंक के साथ 24.64 मिलियन डालर का वैश्विक पर्यावरण सुगमता अनुदान समझौता

       भारत ने पारिस्थितिक तंत्र सेवा सुधार परियोजना के लिए विश्‍व बैंक के साथ 24.64 मिलियन अमेरिकी डालर का वैश्विक पर्यावरण सुगमता अनुदान समझौता किया है। 

     भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्‍त सचिव समीर कुमार खरे और विश्‍व बैंक के भारत में कार्यकारी कंट्री डायरेक्‍टर हिशम एबदो काहिन ने इस समझौता पर हस्‍ताक्षर किये। भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की ओर से अनुसंधान उप महानिदेशक डॉ. नीलू गेरा, मध्‍यप्रदेश सरकार की ओर से अपर प्रधान प्रमुख वन संरक्षक अमिताभ अग्निहोत्री, छत्‍तीसगढ़ सरकार की ओर से अपर प्रधान प्रमुख वन संरक्षक आर. बी. पी. सिन्‍हा ने विश्‍व बैंक के भारत में कार्यकारी कंट्री डायरेक्‍टर के साथ परियोजना समझौतों पर हस्‍ताक्षर किये।
     परियोजना 24.64 मिलियन अमेरिकी की डालर है। इसका वहन पूर्ण रूप से विश्‍व बैंक का वैश्विक पर्यावरण सुगमता (जीईएफ) ट्रस्‍ट फंड करेगा। परियोजना की अवधि 5 वर्ष है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के माध्‍यम से हरित भारत के राष्‍ट्रीय मिशन के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में इस परियोजना का कार्यान्‍वयन करेगा।
       इस परियोजना का लक्ष्‍य वन विभागों और सामुदायिक संगठनों की संस्‍थागत क्षमता में मजबूती लाना, वन पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं को समृद्ध करना और मध्‍य भारत के उच्‍च क्षेत्रों में वनों पर निर्भर समुदायों की आजीविका में सुधार करना है।

Wednesday, 16 August 2017

भारत व स्वीडन के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों का समझौता

        केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारत व स्वीडन के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दीप्र् समझौता में एक ऐसी व्यापक और सुगम व्यवस्था कायम करने का प्रावधान है जिसके जरिए दोनों देश बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए उत्कृष्ट पद्धतियों और प्रौद्योगिकी का आदान प्रदान करेंगे और साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में मिलकर काम करेंगे। 

      समझौता ज्ञापन भारत को बौद्धिक संपदा प्रणालियों में अनुभव का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाएगा, जिससे दोनों देशों के उद्यमियों, निवेशकों और व्यापारियों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचेगा। दोनों देशों के बीच उत्कृष्ट पद्धतियों के आदान प्रदान से भारत के विविध प्रकार के बौद्धिक अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ेगी और उनका बेहतर संरक्षण किया जा सकेगा।
     ये अधिकार उतने ही विविध हैं जितनी विविधता भारत के लोगों में है। यह समझौता वैश्विक नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति बनने की भारत की यात्रा में ऐतिहासिक सिद्ध होगा और राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति के लक्ष्यों को बढ़ावा देगा। समझौता के अंतर्गत एक संयुक्त समन्वय समिति बनाई जायेगी जो निम्नांकित क्षेत्रों में सहयोग गतिविधियों के बारे में निर्णय करेगी। दोनों देशों के लोगों, व्यापारियों और शैक्षिक संस्थानों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान प्रदान। 
      प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, तकनीकी आदान-प्रदान और संपर्क गतिविधियाँ, संयुक्‍त रूप से या किसी एक राष्‍ट्र द्वारा आयोजित कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्‍यम से उद्योगों, विश्‍वविद्यालयों, अनुसंधान और विकास संगठनों तथा लघु और मध्‍यम उद्यमों के बीच बौद्धिक संपदा के बारे में उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान-प्रदान। 
   पेटेंटों, ट्रेडमार्कों, औद्योगिक डिजाइनों, कापीराइटों और भौगोलिक संकेतकों और साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण, प्रवर्तन और इस्‍तेमाल संबंधी आवेदनों के निपटान के लिए उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान-प्रदान। बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में आटोमेशन और आधुनिकीकरण परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन, नव प्रलेखन और सूचना प्रणालियों और बौद्धिक संपदा के प्रबंधन की प्रक्रियाओं के विकास में सहयोग, यह समझने में सहयोग करना कि परम्‍परागत ज्ञान का संरक्षण कैसे किया जाये; और डेटा बेस संबंधी परम्‍परागत जानकारी सहित उत्‍कृष्‍ट पद्धतियों का आदान-प्रदान।
      वर्तमान बौद्धिक संपदा प्रणालियां के बारे में जागरूकता बढ़ाना, डिजिटल वातावरण, विशेषकर कॉपीराईट मुद्दों में बौद्धिक संपदा कानून के उल्लंघनों के बारे में जानकारी और उत्‍कृष्‍ट पद्धतियों का आदान-प्रदान, अन्‍य सहयोगात्‍मक गतिविधियां, जो दोनों पक्षों द्वारा आपसी समझ-बूझ से तय की जा सकती है।

Tuesday, 8 August 2017

मैक्सिको के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्‍ट्रपति से मुलाकात की

        मैक्सिको कांग्रेस, चैंबर्स ऑफ डिप्टिज की अध्यक्षा सुश्री गौदालुपा मुरगुनिया गुतिर्रस के नेतृत्व में मैक्सिको से आये संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रेपति भवन में भारतीय राष्‍ट्रपति राम नाथ कोबिंद से मुलाकात की। 

       प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोबिंद ने कहा कि भारत और मैक्सिको महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक साझेदार हैं और गहरी लोकतांत्रिक परंपराओं को साझा करते हैं। उन्होंने मैक्सिको के संविधान अंगीकरण के 100 वर्ष पूरा होने पर प्रतिनिधिमंडल को बधाई दी। उन्होंने परमाणु आपूर्ति समूह में भारत की उम्मींदवारी का समर्थन करने के लिए मैक्सिको को धन्यवाद दिया।
        उन्होंने यह भी कहा कि सौर उर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के आगे बढ़ने की गुंजाइश है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2016 में संपन्न हुई सफल मैक्सिको यात्रा का भी उल्ले्ख किया। उन्होंने आगे यह भी कहा कि भारत मैक्सिको के राष्ट्रैपति महामहिम इनरिक्यूभ पेना नियटो की भारत यात्रा के लिए आशावान है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को सफल यात्रा की शुभकामनायें दी।