Wednesday, 23 August 2017

गृह मंत्री की किरगिज गणराज्य की यात्रा

     केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह 24-25 अगस्त, 2017 को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों राज्यों के सरकार के प्रमुखों की 9वीं बैठक में शामिल होने के लिए किरगीज जा रहे है।

      गृह मंत्री के साथ एक शिष्टमंडल भी जा रहा है। इस बैठक में आपात स्थितियों की रोकथाम और समाप्ति पर विचार किया जाएगा। भारतीय शिष्टमंडल में गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी हैं। भारत को एससीओ की पूर्ण सदस्यता इस वर्ष मिली और जून, 2017 में कजाखस्तान के अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संघठन की वार्षिक शिखर बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शामिल हुए थे। एससीओ सदस्य के रूप में भारत की भागीदारी से एससीओ के ढांचे में अंतर्गत आबादी और भू-भाग की सुरक्षा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विकास को गति देने का अवसर मिलेगा।
        इससे क्षेत्रीय और वैश्विक प्रारूप में गुणात्मक रूप से नई स्थिति बनेगी।शंघाई सहयोग संगठन के सरकारों के प्रमुखों की बैठक में आपात स्थितियों को समाप्त करने में सदस्यों देशों की सरकारों के बीच हुए समझौते को लागू करने के लिए 2018-19 की कार्य योजना के प्रारूप पर विचार किया जाएगा और इसको मंजूरी दी जाएगी। अपनी यात्रा के दौरान गृह मंत्री कुछ एससीओ सदस्यों देशों के मंत्रियों से द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

Thursday, 17 August 2017

विश्‍व बैंक के साथ 24.64 मिलियन डालर का वैश्विक पर्यावरण सुगमता अनुदान समझौता

       भारत ने पारिस्थितिक तंत्र सेवा सुधार परियोजना के लिए विश्‍व बैंक के साथ 24.64 मिलियन अमेरिकी डालर का वैश्विक पर्यावरण सुगमता अनुदान समझौता किया है। 

     भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्‍त सचिव समीर कुमार खरे और विश्‍व बैंक के भारत में कार्यकारी कंट्री डायरेक्‍टर हिशम एबदो काहिन ने इस समझौता पर हस्‍ताक्षर किये। भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की ओर से अनुसंधान उप महानिदेशक डॉ. नीलू गेरा, मध्‍यप्रदेश सरकार की ओर से अपर प्रधान प्रमुख वन संरक्षक अमिताभ अग्निहोत्री, छत्‍तीसगढ़ सरकार की ओर से अपर प्रधान प्रमुख वन संरक्षक आर. बी. पी. सिन्‍हा ने विश्‍व बैंक के भारत में कार्यकारी कंट्री डायरेक्‍टर के साथ परियोजना समझौतों पर हस्‍ताक्षर किये।
     परियोजना 24.64 मिलियन अमेरिकी की डालर है। इसका वहन पूर्ण रूप से विश्‍व बैंक का वैश्विक पर्यावरण सुगमता (जीईएफ) ट्रस्‍ट फंड करेगा। परियोजना की अवधि 5 वर्ष है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के माध्‍यम से हरित भारत के राष्‍ट्रीय मिशन के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में इस परियोजना का कार्यान्‍वयन करेगा।
       इस परियोजना का लक्ष्‍य वन विभागों और सामुदायिक संगठनों की संस्‍थागत क्षमता में मजबूती लाना, वन पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं को समृद्ध करना और मध्‍य भारत के उच्‍च क्षेत्रों में वनों पर निर्भर समुदायों की आजीविका में सुधार करना है।

Wednesday, 16 August 2017

भारत व स्वीडन के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों का समझौता

        केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारत व स्वीडन के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दीप्र् समझौता में एक ऐसी व्यापक और सुगम व्यवस्था कायम करने का प्रावधान है जिसके जरिए दोनों देश बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए उत्कृष्ट पद्धतियों और प्रौद्योगिकी का आदान प्रदान करेंगे और साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में मिलकर काम करेंगे। 

      समझौता ज्ञापन भारत को बौद्धिक संपदा प्रणालियों में अनुभव का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाएगा, जिससे दोनों देशों के उद्यमियों, निवेशकों और व्यापारियों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचेगा। दोनों देशों के बीच उत्कृष्ट पद्धतियों के आदान प्रदान से भारत के विविध प्रकार के बौद्धिक अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ेगी और उनका बेहतर संरक्षण किया जा सकेगा।
     ये अधिकार उतने ही विविध हैं जितनी विविधता भारत के लोगों में है। यह समझौता वैश्विक नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति बनने की भारत की यात्रा में ऐतिहासिक सिद्ध होगा और राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति के लक्ष्यों को बढ़ावा देगा। समझौता के अंतर्गत एक संयुक्त समन्वय समिति बनाई जायेगी जो निम्नांकित क्षेत्रों में सहयोग गतिविधियों के बारे में निर्णय करेगी। दोनों देशों के लोगों, व्यापारियों और शैक्षिक संस्थानों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान प्रदान। 
      प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, तकनीकी आदान-प्रदान और संपर्क गतिविधियाँ, संयुक्‍त रूप से या किसी एक राष्‍ट्र द्वारा आयोजित कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्‍यम से उद्योगों, विश्‍वविद्यालयों, अनुसंधान और विकास संगठनों तथा लघु और मध्‍यम उद्यमों के बीच बौद्धिक संपदा के बारे में उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान-प्रदान। 
   पेटेंटों, ट्रेडमार्कों, औद्योगिक डिजाइनों, कापीराइटों और भौगोलिक संकेतकों और साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण, प्रवर्तन और इस्‍तेमाल संबंधी आवेदनों के निपटान के लिए उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान-प्रदान। बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में आटोमेशन और आधुनिकीकरण परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन, नव प्रलेखन और सूचना प्रणालियों और बौद्धिक संपदा के प्रबंधन की प्रक्रियाओं के विकास में सहयोग, यह समझने में सहयोग करना कि परम्‍परागत ज्ञान का संरक्षण कैसे किया जाये; और डेटा बेस संबंधी परम्‍परागत जानकारी सहित उत्‍कृष्‍ट पद्धतियों का आदान-प्रदान।
      वर्तमान बौद्धिक संपदा प्रणालियां के बारे में जागरूकता बढ़ाना, डिजिटल वातावरण, विशेषकर कॉपीराईट मुद्दों में बौद्धिक संपदा कानून के उल्लंघनों के बारे में जानकारी और उत्‍कृष्‍ट पद्धतियों का आदान-प्रदान, अन्‍य सहयोगात्‍मक गतिविधियां, जो दोनों पक्षों द्वारा आपसी समझ-बूझ से तय की जा सकती है।

Tuesday, 8 August 2017

मैक्सिको के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्‍ट्रपति से मुलाकात की

        मैक्सिको कांग्रेस, चैंबर्स ऑफ डिप्टिज की अध्यक्षा सुश्री गौदालुपा मुरगुनिया गुतिर्रस के नेतृत्व में मैक्सिको से आये संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रेपति भवन में भारतीय राष्‍ट्रपति राम नाथ कोबिंद से मुलाकात की। 

       प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोबिंद ने कहा कि भारत और मैक्सिको महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक साझेदार हैं और गहरी लोकतांत्रिक परंपराओं को साझा करते हैं। उन्होंने मैक्सिको के संविधान अंगीकरण के 100 वर्ष पूरा होने पर प्रतिनिधिमंडल को बधाई दी। उन्होंने परमाणु आपूर्ति समूह में भारत की उम्मींदवारी का समर्थन करने के लिए मैक्सिको को धन्यवाद दिया।
        उन्होंने यह भी कहा कि सौर उर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के आगे बढ़ने की गुंजाइश है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2016 में संपन्न हुई सफल मैक्सिको यात्रा का भी उल्ले्ख किया। उन्होंने आगे यह भी कहा कि भारत मैक्सिको के राष्ट्रैपति महामहिम इनरिक्यूभ पेना नियटो की भारत यात्रा के लिए आशावान है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को सफल यात्रा की शुभकामनायें दी।

भारत-ईरान की चाबहार बंदरगाह में परिचालन जल्‍द शुरू करने की प्रतिबद्धता

         केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं शिपिंग मंत्री नितिन जयराम गडकरी दो दिवसीय ईरान यात्रा से वापस लौट आये हैं। उन्‍होंने ईरान के राष्‍ट्रपति डॉ. हसन रोहानी के शपथ समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्‍व किया। यह उनका दूसरा कार्यकाल है। 

       डॉ. हसन रोहानी के साथ वार्तालाप में गडकरी ने उनको भारतीय प्रधानमंत्री का शुभकामना और बधाई संदेश दिया। गडकरी ने उनको सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनायें भी दी। उन्‍होंने ईरान के राष्‍ट्रपति को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बधाई पत्र भी सौंपा और ईरान के राष्‍ट्रपति को भारत यात्रा के लिए आमंत्रित किया। 
        गड़करी ने बाद में चाबहार बंदरगाह के विकास और चाबहार को जहेदन से रेल के जरिये जोड़ने की प्रस्‍तावित परियोजना में भारत के सहयोग समेत कई मुदृं पर चर्चा की। बैठक में दोनों पक्षों ने छबाहर बंदरगाह के विकास में हुई प्रगति समेत पिछले वर्ष भारतीय प्रधानमंत्री की ईरान यात्रा के दौरान लिए गए निर्णयों के कार्यान्‍वयन की प्रगति पर सकारात्‍मक माना। दोनों पक्षों ने चाबहार बंदरगाह के परिचालन को जल्‍द से जल्‍द पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
        गडकरी ने उप राष्‍ट्रपति डॉ. ई. जहांगिरी से मुलाकात कर चाबहार बंदरगाह के विकास के समझौते की कार्यशीलता के मुद्दे का उल्‍लेख किया। उन्‍हें बताया कि इंडिया पोर्ट ग्‍लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) ने रेल माउंटिड गंट्री क्रेन (आरएमजीसी) जैसे महत्‍वपूर्ण उपकरणों का प्रबंध कर लिया है। रबर टायर मोबाइल क्रेन (आरटीएमसी) एमटी कंटेनर हैंडलर्स (एमटीसीएच), ट्रक, ट्रेक्‍टर ट्रेलर कंटेनर एवं संबंधित उपकरणों के आर्डर को अंतिम रूप देने के करीब है। 
       उन्‍होंने यह भी बताया कि भारत समझौते के समय से पहले अंतरिम अवधि के मध्‍य चाबहार बंदरगाह के परिचालन के लिए सहायता प्रदान करने के लिए भी तैयार है। उन्‍होंने ईरानी पक्ष से अनुरोध किया कि वे चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए जल्‍द से जल्‍द एक्सिम बैंक ऑफ इंडिया को ऋण का आवेदन कर दें ताकि दोनों देशों के मध्‍य हुए समझौते को सक्रिय किया जा सके। 
      ईरान ने भारत से 15 करोड़ डालर के ऋण उपलब्‍ध कराने का अनुरोध किया था। चाबहार बंदरगाह समझौते के सक्रियता के लिए इसकी शर्त रखी थी। एक्सिम बैंक ऑफ इंडिया को अभी भी इस ऋण के आवेदन का इंतजार है। इसके पश्‍चात गडकरी ने ईरान के सड़क और शहरी विकास मंत्री डॉ. अब्‍बास अखोंदी से मुलाकात की।उन्‍हें चाबहार बंदरगाह समझौते के अंतर्गत आने वाले दो टर्मिनल के लिए बहूउदद्देशीय और कंटेनर उपकरणों के प्रबंधन और उपलब्‍धता के बारे में नवीनतम जानकारी दी। 
       उन्‍होंने डॉ. अब्‍बास अखोंदी से चाबहार बंदरगाह के सहायक परिचालन के हित में ईरानी पक्ष को ऋण आवेदन जमा होने की शर्त को हटाने का भी अनुरोध किया, क्‍योंकि इसमें काफी समय लग रहा है। ईरानी पक्ष ने आश्‍वासन दिया कि एक्सिम बैंक ऑफ इंडिया को जल्‍द ही ऋण का आवेदन किया जाएगा।

Sunday, 6 August 2017

भारत को चाबहार बन्दरगाह पर 2018 में परिचालन की उम्मीद

       सड़क परिवहन व राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री नितीन गडकरी ने कहा कि सरकार ईरान में चाबहार बन्दरगाह के विकास के लिए कृत संकल्प है। 

     आशा है कि 2018 में इस पर परिचालन आरम्भ हो जाएगा। नीतिन गडकरी तेहरान में राष्ट्रपति हसन रूहानी द्वारा दूसरी बार कार्यभार संभालने पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के तौर वहां गए है। ईरान दौरे की पूर्व संध्या पर मंत्री ने कहा कि भारत व ईरान के बीच प्रगाढ़ ऐतिहासिक संबंध है। नितिन गडकरी ने जानकारी दी कि चाबहार बन्दरगाह पर निर्माण कार्य पहले से आरम्भ हो गया है।
      भारत सरकार ने बन्दरगाह के विकास के लिए छः बिलियन रूपये आबंटित किये हैं। इनमे से उपकरणों के लिए 380 करोड़ रुपये धनराशि की निविदा को पहले से अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कार्य को शीघ्रता से पूरा करने के लिए ईरान सरकार आवश्यक अनुमोदनों को स्वीकृति प्रदान कर देगी। 
     गडकरी ने कहा कि चाबहार बन्दरगाह दोनों राष्ट्रों के सम्बन्धों एवं इस क्षेत्र में व्यापार एवं कारोबार को बढ़ावा देगा। चाहबहार बन्दरगाह दक्षिण पूर्वी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित है। यह बन्दरगाह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बहुत उपयोगी है।
       पिछले साल मई में भारत और ईरान के बीच हुए सम्झौते के अनुसार भारत चाहबहार बन्दरगाह के पहले चरण के लिए दो बर्थ शुरू और उपकरणों से लैस करेगा। 10 वर्ष की लीज पर 85.21 मिलियन (अमरिकी डॉलर) का पूञ्जी निवेश किया जाएगा और वार्षिक राजस्व 22.95 मिलियन होगा।

Friday, 4 August 2017

जनरल बिपिन रावत ने कज़ाखस्तान के सेना प्रमुख से मुलाकात की

         जनरल बिपिन रावत छह दिवसीय कज़ाखस्तान और तुर्कमेनिस्तान के दौरे पर हैं। उन्होंने कज़ाखस्तान के थलसेना प्रमुख से मुलाकात कर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने संबंधी विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। 

      दोनों देश नवंबर 2017 में हिमाचल प्रदेश के बकलोह में संयुक्त सैन्य अभ्यास करने पर पारस्परिक रूप से सहमत हुए। जनरल रावत ने संयुक्त राष्ट्र शांति प्रक्रिया में कज़ाखस्तान की तैनाती को भारत की ओर समर्थन का वादा किया। 
      कज़ाखस्तान ने उग्रवाद विरोधी ऑपरेशन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, सेना शिक्षा और भारत में सैन्यकर्मियों के प्रशिक्षण के संबंध में सहायता की मांग की।
      भारतीय सेना प्रमुख ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने 36 एयर असॉल्ट ब्रिगेड दौरे के दौरान कज़ाख सेना के शानदार प्रदर्शन एवं पराक्रम की सराहना की। जनरल बिपिन रावत कल तुर्कमेनिस्तान के लिए रवाना होंगे।