Tuesday, 8 August 2017

मैक्सिको के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्‍ट्रपति से मुलाकात की

        मैक्सिको कांग्रेस, चैंबर्स ऑफ डिप्टिज की अध्यक्षा सुश्री गौदालुपा मुरगुनिया गुतिर्रस के नेतृत्व में मैक्सिको से आये संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रेपति भवन में भारतीय राष्‍ट्रपति राम नाथ कोबिंद से मुलाकात की। 

       प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोबिंद ने कहा कि भारत और मैक्सिको महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक साझेदार हैं और गहरी लोकतांत्रिक परंपराओं को साझा करते हैं। उन्होंने मैक्सिको के संविधान अंगीकरण के 100 वर्ष पूरा होने पर प्रतिनिधिमंडल को बधाई दी। उन्होंने परमाणु आपूर्ति समूह में भारत की उम्मींदवारी का समर्थन करने के लिए मैक्सिको को धन्यवाद दिया।
        उन्होंने यह भी कहा कि सौर उर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के आगे बढ़ने की गुंजाइश है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2016 में संपन्न हुई सफल मैक्सिको यात्रा का भी उल्ले्ख किया। उन्होंने आगे यह भी कहा कि भारत मैक्सिको के राष्ट्रैपति महामहिम इनरिक्यूभ पेना नियटो की भारत यात्रा के लिए आशावान है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को सफल यात्रा की शुभकामनायें दी।

भारत-ईरान की चाबहार बंदरगाह में परिचालन जल्‍द शुरू करने की प्रतिबद्धता

         केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं शिपिंग मंत्री नितिन जयराम गडकरी दो दिवसीय ईरान यात्रा से वापस लौट आये हैं। उन्‍होंने ईरान के राष्‍ट्रपति डॉ. हसन रोहानी के शपथ समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्‍व किया। यह उनका दूसरा कार्यकाल है। 

       डॉ. हसन रोहानी के साथ वार्तालाप में गडकरी ने उनको भारतीय प्रधानमंत्री का शुभकामना और बधाई संदेश दिया। गडकरी ने उनको सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनायें भी दी। उन्‍होंने ईरान के राष्‍ट्रपति को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बधाई पत्र भी सौंपा और ईरान के राष्‍ट्रपति को भारत यात्रा के लिए आमंत्रित किया। 
        गड़करी ने बाद में चाबहार बंदरगाह के विकास और चाबहार को जहेदन से रेल के जरिये जोड़ने की प्रस्‍तावित परियोजना में भारत के सहयोग समेत कई मुदृं पर चर्चा की। बैठक में दोनों पक्षों ने छबाहर बंदरगाह के विकास में हुई प्रगति समेत पिछले वर्ष भारतीय प्रधानमंत्री की ईरान यात्रा के दौरान लिए गए निर्णयों के कार्यान्‍वयन की प्रगति पर सकारात्‍मक माना। दोनों पक्षों ने चाबहार बंदरगाह के परिचालन को जल्‍द से जल्‍द पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
        गडकरी ने उप राष्‍ट्रपति डॉ. ई. जहांगिरी से मुलाकात कर चाबहार बंदरगाह के विकास के समझौते की कार्यशीलता के मुद्दे का उल्‍लेख किया। उन्‍हें बताया कि इंडिया पोर्ट ग्‍लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) ने रेल माउंटिड गंट्री क्रेन (आरएमजीसी) जैसे महत्‍वपूर्ण उपकरणों का प्रबंध कर लिया है। रबर टायर मोबाइल क्रेन (आरटीएमसी) एमटी कंटेनर हैंडलर्स (एमटीसीएच), ट्रक, ट्रेक्‍टर ट्रेलर कंटेनर एवं संबंधित उपकरणों के आर्डर को अंतिम रूप देने के करीब है। 
       उन्‍होंने यह भी बताया कि भारत समझौते के समय से पहले अंतरिम अवधि के मध्‍य चाबहार बंदरगाह के परिचालन के लिए सहायता प्रदान करने के लिए भी तैयार है। उन्‍होंने ईरानी पक्ष से अनुरोध किया कि वे चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए जल्‍द से जल्‍द एक्सिम बैंक ऑफ इंडिया को ऋण का आवेदन कर दें ताकि दोनों देशों के मध्‍य हुए समझौते को सक्रिय किया जा सके। 
      ईरान ने भारत से 15 करोड़ डालर के ऋण उपलब्‍ध कराने का अनुरोध किया था। चाबहार बंदरगाह समझौते के सक्रियता के लिए इसकी शर्त रखी थी। एक्सिम बैंक ऑफ इंडिया को अभी भी इस ऋण के आवेदन का इंतजार है। इसके पश्‍चात गडकरी ने ईरान के सड़क और शहरी विकास मंत्री डॉ. अब्‍बास अखोंदी से मुलाकात की।उन्‍हें चाबहार बंदरगाह समझौते के अंतर्गत आने वाले दो टर्मिनल के लिए बहूउदद्देशीय और कंटेनर उपकरणों के प्रबंधन और उपलब्‍धता के बारे में नवीनतम जानकारी दी। 
       उन्‍होंने डॉ. अब्‍बास अखोंदी से चाबहार बंदरगाह के सहायक परिचालन के हित में ईरानी पक्ष को ऋण आवेदन जमा होने की शर्त को हटाने का भी अनुरोध किया, क्‍योंकि इसमें काफी समय लग रहा है। ईरानी पक्ष ने आश्‍वासन दिया कि एक्सिम बैंक ऑफ इंडिया को जल्‍द ही ऋण का आवेदन किया जाएगा।

Sunday, 6 August 2017

भारत को चाबहार बन्दरगाह पर 2018 में परिचालन की उम्मीद

       सड़क परिवहन व राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री नितीन गडकरी ने कहा कि सरकार ईरान में चाबहार बन्दरगाह के विकास के लिए कृत संकल्प है। 

     आशा है कि 2018 में इस पर परिचालन आरम्भ हो जाएगा। नीतिन गडकरी तेहरान में राष्ट्रपति हसन रूहानी द्वारा दूसरी बार कार्यभार संभालने पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के तौर वहां गए है। ईरान दौरे की पूर्व संध्या पर मंत्री ने कहा कि भारत व ईरान के बीच प्रगाढ़ ऐतिहासिक संबंध है। नितिन गडकरी ने जानकारी दी कि चाबहार बन्दरगाह पर निर्माण कार्य पहले से आरम्भ हो गया है।
      भारत सरकार ने बन्दरगाह के विकास के लिए छः बिलियन रूपये आबंटित किये हैं। इनमे से उपकरणों के लिए 380 करोड़ रुपये धनराशि की निविदा को पहले से अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कार्य को शीघ्रता से पूरा करने के लिए ईरान सरकार आवश्यक अनुमोदनों को स्वीकृति प्रदान कर देगी। 
     गडकरी ने कहा कि चाबहार बन्दरगाह दोनों राष्ट्रों के सम्बन्धों एवं इस क्षेत्र में व्यापार एवं कारोबार को बढ़ावा देगा। चाहबहार बन्दरगाह दक्षिण पूर्वी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित है। यह बन्दरगाह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बहुत उपयोगी है।
       पिछले साल मई में भारत और ईरान के बीच हुए सम्झौते के अनुसार भारत चाहबहार बन्दरगाह के पहले चरण के लिए दो बर्थ शुरू और उपकरणों से लैस करेगा। 10 वर्ष की लीज पर 85.21 मिलियन (अमरिकी डॉलर) का पूञ्जी निवेश किया जाएगा और वार्षिक राजस्व 22.95 मिलियन होगा।

Friday, 4 August 2017

जनरल बिपिन रावत ने कज़ाखस्तान के सेना प्रमुख से मुलाकात की

         जनरल बिपिन रावत छह दिवसीय कज़ाखस्तान और तुर्कमेनिस्तान के दौरे पर हैं। उन्होंने कज़ाखस्तान के थलसेना प्रमुख से मुलाकात कर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने संबंधी विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। 

      दोनों देश नवंबर 2017 में हिमाचल प्रदेश के बकलोह में संयुक्त सैन्य अभ्यास करने पर पारस्परिक रूप से सहमत हुए। जनरल रावत ने संयुक्त राष्ट्र शांति प्रक्रिया में कज़ाखस्तान की तैनाती को भारत की ओर समर्थन का वादा किया। 
      कज़ाखस्तान ने उग्रवाद विरोधी ऑपरेशन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, सेना शिक्षा और भारत में सैन्यकर्मियों के प्रशिक्षण के संबंध में सहायता की मांग की।
      भारतीय सेना प्रमुख ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने 36 एयर असॉल्ट ब्रिगेड दौरे के दौरान कज़ाख सेना के शानदार प्रदर्शन एवं पराक्रम की सराहना की। जनरल बिपिन रावत कल तुर्कमेनिस्तान के लिए रवाना होंगे।

Wednesday, 2 August 2017

भारत-स्‍पेन में अक्षय ऊर्जा सहयोग

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत–स्‍पेन सहयोग पर भारत और स्‍पेन के बीच हुए सहमति पत्र (एमओयू) से अवगत कराया गया है।

    इस एमओयू पर स्‍पेन में 30 मई, 2017 को हस्‍ताक्षर किये गये थे। इस एमओयू से विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और सूचनाओं की नेटवर्किंग के जरिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढाने में मदद मिलेगी। दोनों पक्षों ने सहकारी संस्‍थागत रिश्‍ते का एक समुचित आधार स्‍थापित करने का लक्ष्‍य रखा है, ताकि आपसी लाभ वाली समानता एवं पारस्‍परिकता के आधार पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित मसलों पर तकनीकी द्विपक्षीय सहयोग को प्रोत्‍साहित किया जा सके। 
      इस एमओयू के तहत एक संयुक्‍त कार्यकारी समिति के गठन की परिकल्‍पना की गई है, जो सहयोग के क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों की समीक्षा एवं निगरानी करने के साथ-साथ उन पर चर्चाएं भी करेगी।

ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक में ई-कामर्स सहयोग की पहल

       ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों की सातवीं बैठक संघाई में 1-2 अगस्त को हुई। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में 6 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल शामिल हुआ।

      इसमें विश्व व्यापार संगठन में जनसंपर्क अधिकारी और राजदूत जे एस दीपक भी शामिल थे। बैठक की अध्यक्षता चीन के वाणिज्य मंत्री ज़ोंग शन ने की। दक्षिण अफ्रीका के व्यापार और उद्योग मंत्री रोब डेविस, ब्राजील के उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य एवं सेवा सचिव मारसेलो माइया टवेयर्स डी अराउजो और रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम ओरेश्किन भी अपने-अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक में शरीक हुए। 
        ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों ने 2 अगस्त पूर्वाह्न चीन के उप-प्रधान मंत्री वांग यंग से औपचारिक मुलाकात की। बैठक से हटकर 1 अगस्त पूर्वाह्न चीन के वाणिज्य मंत्री और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के बीच द्वीपक्षीय बैठक हुई। 
       बैठक के बाद ब्रिक्स देशों में सेवाओं में व्यापार पर सहयोग की रूपरेखा, ब्रिक्स ई-कामर्स सहयोग पहल, ब्रिक्स आईपीआर सहयोग दिशा-निर्देश, ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने का प्रारूप, ब्रिक्स मॉडल ई-पोर्ट नेटवर्क के संदर्भ की शर्तें, ब्रिक्स निवेश सुविधा की रूपरेखा दस्तावेज स्वीकार किए गए।

Friday, 28 July 2017

भारत का ब्रिक्‍स में सामाजिक सुरक्षा सहयोग के संस्‍थानीकरण का समर्थन

      श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बंडारू दत्तात्रेय के नेतृत्व में भारतीय शिष्टमंडल ने चीन के चोंगगिंग में आयोजित ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया।

      चीन वर्ष 2017 के लिए ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक का अध्यक्ष है। भारतीय शिष्टमंडल में एम सत्यवती, सचिव (श्रम और रोजगार), मनीष गुप्‍ता, संयुक्‍त सचिव, अनुजा बापट, निदेशक और प्रो. शशिकुमार, वरिष्‍ठ फेलो, वीवीजीएनएलआई शामिल थे।
        बैठक का समापन चोंगगिंग, चीन में ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों द्वारा ब्रिक्‍स श्रम और रोजगार मंत्रिस्‍तरीय घोषणा पत्र को स्‍वीकार किए जाने के साथ हुआ। इस घोषणा पत्र में ब्रिक्‍स देशों के लिए महत्‍वपूर्ण विविध क्षेत्रों को कवर किया गया।
      साथ ही भारत द्वारा उचित संस्‍थानीकरण के माध्‍यम से इन क्षेत्रों में सहयोग और सहकारिता को सुदृढ़ता प्रदान करने का आह्वान किया गया। इन क्षेत्रों में कार्य के भविष्‍य के बारे में गवर्नेंस, ब्रिक्‍स में विकास के लिए कौशल, सार्वभौमिक और टिकाऊ सामाजिक सुरक्षा प्रणालियां, श्रम अनुसंधान संस्‍थानों का ब्रिक्‍स नेटवर्क, ब्रिक्‍स सामाजिक सुरक्षा सहयोग प्रारूप और ब्रिक्‍स उद्यमिता अनुसंधान शामिल हैं।
       इस अवसर पर बंडारू दत्‍तात्रेय ने कहा कि अंशकालिक कार्य, अस्‍थायी कार्य, निश्चित अवधि का अनुबंध और उपअनुबंध, घर से किया जाने वाला कार्य, आदि जैसे रोजगार के गैर-मानक स्‍वरूपों के उदय के मद्देनजर ब्रिक्‍स देशों को ‘कार्य के भविष्‍य’ की चुनौतियों से निपटने में सहयोग करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के कार्य ब्रिक्‍स देशों में रोजगार बाजारों का स्‍वरूप बदल रहे हैं। 
      ब्रिक्‍स देशों के श्रम संस्‍थानों की नेटवर्किंग से सूचना के नियमित आदान-प्रदान और इस क्षेत्र में तथा अन्‍य साझा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाए जाने की व्‍यवस्‍था तैयार हो सकती है। श्रम और रोजगार मंत्री ने दोहराया कि भारत ने विश्‍व आपूर्ति श्रृंखला में हमेशा सीबीडीआर के सिद्धांतों का पालन किया है और उसे खुशी है कि ब्रिक्‍स देशों ने भी इसी नीतिगत दृष्टिकोण को दोहराया है। दत्‍तात्रेय ने कहा कि प्रभावी और पारदर्शी श्रम गवर्नेंस के ढांचे का निर्माण करने में प्रौद्योगिकी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 
        उन्‍होंने कहा कि भारत में सेवाओं को प्रभावी, समयबद्ध और कुशलता से प्रदान करने के लिए तथा वित्‍तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार सृजन और कौशल सहित सरल और पारदर्शी अनुपालन ढांचा तैयार करने के लिए आईसीटी का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। दत्‍तात्रेय ने जोर देकर कहा कि कौशल न केवल कामगारों की रोजगार की क्षमता में व़द्धि करता है, बल्कि नियोक्‍ताओं की उत्‍पादकता भी बढ़ाता है, जिससे देश में संवर्धित उत्‍पादन, संवर्धित राजस्‍व प्रवाह और संवर्धित जीडीपी का चक्र तैयार होता है। 
          भारत ने कौशल के जरिए गरीबी उन्‍मूलन और उसमें कमी लाने संबंधी ब्रिक्‍स की कार्ययोजना का अनुमोदन किया। इस कार्य योजना में अन्‍य बातों के अलावा, समग्र राष्‍ट्रीय योजना में गरीबों को शामिल करने की नीतिगत सिफारिशें शामिल हैं, ताकि व्‍यवसायिक प्रशिक्षण, बेहतर आजीवन व्‍यवसायिक प्रशिक्षण और शिक्षण प्रणालियां, अनुसंधान संबंधी पहल के लिए अच्‍छी गुणवत्‍ता वाली प्रशिक्षुता को बढ़ावा, सरकारों, क्षेत्रों और उद्यमों के बीच सहयोग मजबूत बनाना संभव हो सके तथा ऐसे गठबंधन बनाने के लिए ब्रिक्‍स राष्‍ट्रीय अनुसंधान संस्‍थानों के नेटवर्क का इस्‍तेमाल किया जा सके।
     भारत ने ब्रिक्‍स द्वारा व्‍यक्‍त की गई सामूहिक प्रतिबद्धताओं को आगे ले जाने के लिए चीन की सराहना की। भारत ने ब्रिक्‍स के लिए प्रस्‍तावित सामाजिक सुरक्षा सहयोग प्रारूप के संस्‍थानीकरण का समर्थन किया, क्‍योंकि इससे हमें सामाजिक सुरक्षा के सार्वभौमिकरण विशेषकर कार्य के मानक स्‍वरूपों के बारे में ब्रिक्‍स के अन्‍य सदस्‍य देशों द्वारा अपनाई जा रही रणनीतियों का पता चल सकेगा। 
       उन्‍होंने कहा कि श्रम बाजार सूचना में विषमता हम सभी के लिए बड़ी चुनौती है। उन्‍होंने कहा कि इस संदर्भ में राष्‍ट्रीय श्रम संस्‍थानों का नेटवर्क एकीकृत अनुसंधान और सूचना साझा करने के लिए महत्‍वपूर्ण संभावनाएं प्रस्‍तुत करता है। दत्‍तात्रेय ने कहा कि यह नेटवर्क उपयुक्‍त श्रम और रोजगार मामलों पर साझा दृ‍ष्टिकोण कायम करने में हमारी सहायता भी करेगा।
      उन्‍होंने कहा कि नवोन्‍मेष और उद्यमिता को प्रोत्‍साहन देना भारत के लिए महत्‍वपूर्ण प्राथमिकता है। भारत ने ब्रिक्‍स उद्यमिता पहल को मजबूती प्रदान करने के लिए ब्रिक्‍स के सदस्‍य देशों के साथ मिलकर कार्य करने की इच्‍छा प्रकट की। ब्रिक्‍स श्रम और रोजगार मंत्र‍िस्‍तरीय घोषणा पत्र अब चीन में होने वाले राष्‍ट्राध्‍यक्षों/शासनाध्‍यक्षों के शिखर सम्‍मेलन में प्रस्‍तुत किया जाएगा।