Wednesday, 21 June 2017

अमरीका के सम्‍मेलन में भारतीय पवेलियन, जैव अर्थव्‍यवस्‍था 42 अरब डॉलर

           विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्‍वी विज्ञान राज्‍य मंत्री वाई.एस. चौधरी ने सान डिएगो में जैव प्रौद्योगिकी नवाचार संगठन (बीआईओ) के अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में भारतीय पवेलियन का उद्घाटन किया। 

         भारतीय पवेलियन की विषय वस्‍तु में ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर दिया गया है। चौधरी ने पवेलियन का उद्धाटन करने हुए कहा कि बीआईओ के दौरान हुए सकारात्‍मक विचार विमर्श से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय स्‍टार्ट अप कंपनियों के लिए अनेक नये अवसर खुलेंगे और भारतीय जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतर्राष्‍ट्रीय साझेदारों का विश्‍वास बढ़ेगा। भारतीय पवेलियन में 30 से अधिक स्‍टार्ट अप कंपनियां, राज्‍य सरकारें, बायो टैक पार्क और अनुसंधान संस्‍थानों को प्रदर्शित किया गया है। 
        बीआईओ ने 60 से अधिक देशों के 15000 प्रतिनिधियों को आकर्षित किया है और एक ही स्‍थान पर वैश्विक अवसर प्रदान किये हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्‍य मंत्री ने 60 पृष्‍ठों की एक ‘इंडिया बायोटैक हैंडबुक 2017’ जारी की, इसमें भारत की 42 अरब डॉलर की तेजी से बढ़ती जैव अर्थव्‍यवस्‍था की ताकत को दर्शाया गया है।

Tuesday, 20 June 2017

भारत व पुर्तगाल के बीच अभिलेखागार सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समझौता

     भारत व पुर्तगाल ने अभिलेखागार सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते पर पुर्तगाल की राजधानी लिसबन में भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार और पुर्तगाल गणराज्य के संस्कृति मंत्रालय के बीच 17 मई, 2017 को हस्ताक्षर किए गए।

      समझौते के अंतर्गत पहले कदम के रूप में टौरे दो तोम्बो (नेशनल आर्काइव्स ऑफ पुर्तगाल) ने ‘मोनकॉस दो रीनो’(मॉनसून कॉरस्पान्डन्स) नाम से संग्रह के 62 संस्करणों की डिजिटल प्रतियां राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंपी। ये संस्करण मूल रूप से 1568 से 1914 तक की अवधि तक के 456 संस्करणों का हिस्सा रहे हैं। यह गोवा स्टेट आर्काइव्स के सभी रिकॉर्ड संग्रहों में सबसे बड़ा है। संग्रह में लिसबन से गोवा की सीधा लिखा-पढ़ी को शामिल किया गया है और यह एशिया में पुर्तगाली विस्तार, अरबों के साथ उनके व्यापारिक विरोधियों और यूरोपीय शक्तियों तथा दक्षिण एशिया और पूर्व एशिया में पड़ोसी राजाओं के साथ उनके संबंधों के अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत है। 
       1605 से 1651 की अवधि के बीच की घटनाओं से जुड़े 12,000 दस्तावेजों वाले इन 62 संस्करणों को 1777 में, गोवा से लिसबन भेज दिया गया था जहां इन्हें ‘डॉक्यूमेंटोस रेमेटीदोस दा इंडिया’(भारत से भेजे गए दस्तावेज) शीर्षक से 1880 और 1893 के बीच लिसबन में एकेडमी ऑफ साइंस द्वारा प्रकाशित किया गया। 
          मौलिक संस्करण हमेशा लिसबन में रहे हैं। 240 वर्ष बाद गोवा स्टेट आर्काइव्स के संग्रह की श्रृंखलाओं में इस खाई को तब पाटा गया जब 17 मई, 2017 को एक समारोह में पुर्तगाल में भारत की राजदूत के.नंदिनी. सिंगला, सांस्कृतिक समझौता और सहयोग कार्यक्रम इकाई की चीफ ऑफ डिविजन सुश्री टेरेसा आर्टिलहीरो फेरेरा, पुर्तगाल के पुस्तकालय, अभिलेखागार और पुस्तक महानिदेशक, डॉ. एल्मीडा लेसर्दा ने ‘मोनकॉस दो रीनो’ के लापता संस्करणों की डिजिटल इमेज का एक सेट भारत के अभिलेखागार महानिदेशक राघवेंद्र सिंह को सौंपा जिनके नेतृत्व में दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 15-17 मई, 2017 तक पुर्तगाल की यात्रा पर था।
          इस अवसर पर सिंह ने पुर्तगाल और भारत में अभिलेखागार बिरादरी के साथ निकट सहयोग कायम करने के लिए कार्य करने की इच्छा व्यक्त की ताकि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों को बेहतर बनाया जा सके। पुर्तगाल में भारत की राजदूत ने कहा कि पुर्तगाली प्रधानमंत्री की इस वर्ष भारत की सफल यात्रा के बाद दोनों देश टेक्नोलॉजी से शिक्षा और नागर विमानन से फुटबाल तक विभिन्न क्षेत्रों में मिल सहयोग स्थापित कर सकेंगे। संस्कृति हमारे लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण अंग है और इस क्षेत्र में सहयोग सभी को अच्छा लगेगा। 



 

Friday, 16 June 2017

प्रधानमंत्री ने आयरलैंड के ताओसीच के रूप में कार्यभार संभालने पर लियो वराडकर को बधाई दी


         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने महामहिम लियो वराडकर को आयरलैंड के ताओसीच के रूप में कार्यभार संभालने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आयरलैंड के ताओसीच के रूप में अपना कार्यभार संभालने के लिए महामहिम लियो वराडकर को बधाई। 
          मैं भारत-आयरलैंड संबंधों को आगे और मजबूत करने के लिए ताओसीच वराडकर के साथ काम करने की आशा करता हूं।'

कोरिया एशिया व अन्य देशों के लिए लाभदायक

          केंद्रीय वित्त, कार्पोरेट व रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम मून जई इन से मुलाकात की। 

   वित्त मंत्री अरूण जेटली ने राष्ट्रपति मून को हाल ही में हुए चुनाव मे विजय प्राप्त करने पर बधाई दी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं व्यक्त की। जेटली ने मून के क्षेत्र के प्रति उनके दृष्टिकोण और भारत के साथ संबंधों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत दौरे के निमंत्रण का पुनः स्मरण कराते हुए आशा व्यक्त कि दोनो नेताओँ के बीच शीघ्र ही भेंट होगी। कोरिया मे जेटली का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति मून ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चुनाव में विजय प्राप्त करने के लिए उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।
              मून ने विशेष तौर पर ट्विटर में कोरियाई भाषा मे संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का स्मरण किया। 11 मई को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बधाई संदेश देने के लिए किये फोन का स्मरण करते हुए मून ने कहा कि दोनो पक्षों में द्विपक्षीय भागीदारी के निर्माण के लिए प्रबल इच्छा शक्ति है।
             उन्होने कहा कि हाल ही मे चुने गए कोरिया के राष्ट्रपति द्वारा भारत के लिए विशेष दूत की नियुक्ति करने का निर्णय कोरिया के भारत के साथ संबंधो के प्रति  सशक्त प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस निर्णय की सराहना के संदेश के बारे में बताए हुए कहा कि इस प्रकार की शुरूआत भारत के पूर्व की ओर देखो नीति के अनुरूप है। 
            उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरार्राष्ट्रीय संबंधो में उद्यत कोरिया एशिया और अन्य देशों के लिए लाभदायक है। वित्तमंत्री ने राष्ट्रपति मून को हितकारी बैठकों के संबंध में जानकारी दी। जेटली ने दोनो देशों के बीच रक्षा उद्योग,आधारभूत ढांचे में निवेश और उत्पादन में भागीदारी के लिए दोनों देशों विशाल अवसरो के बारे में बताया। 
          राष्ट्रपति मून ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्तमंत्री जेटली के नेतृत्व में ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की सराहना कि और कहा की उन्हें विश्वास है कि भारत शीघ्र ही विशाल आर्थिक शक्ति बनने के पथ पर अग्रसर है।

        उन्होंने कोरिया में भारत के उच्च कुशल योग्य पेशेवर की सराहना की। इससे पहले वित्त मंत्री अरूष जेटली ने प्रमुख कोरियाई कंपनियों के अध्यक्षों,प्रबंध निदेशको और मुख्य कार्यकारी अधिकारियो से मुलाकात की।  



Thursday, 15 June 2017

भारत व आर्मेनिया के बीच युवा मामले पर सहयोग पर आधारित समझौते पर हस्ताक्षर को मंजूरी

         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को भारत व आर्मेनिया के बीच युवा मामले पर आधारित सहयोग के लिए पहले से हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के बारे में अवगत कराया गया।

   इस समझौता ज्ञापन पर अप्रैल 2017 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता 5 वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। इसके बाद 5 वर्ष की अगली अवधि के लिए यह सतह नवीनीकृत हो जाएगा, बशर्ते, कोई एक पक्ष  इस समझौते के समाप्त होने के कम से कम 6 माह पहले अन्य पक्ष को इस समझौते के नवीनीकरण नहीं किए जाने की अपनी भावना से अवगत कराए । किसी एक पक्ष द्वारा लिखित रूप से अन्य पक्ष को 6 माह की पूर्व-सूचना देने के बाद इसे निरस्त किया जा सकेगा। 
            इस समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों द्वारा आयोजनों और गतिविधियों में भागीदारी के माध्यम से युवा मामले पर दोनों देशों के बीच सहयोग को सशक्त बनाना और बढ़ावा देने के साथ ही सूचना और जानकारी साझा करना तथा दोनों देशों के बीच युवाओं के परस्पर आवागमन को भी बढ़ावा देना है। 
           युवा मामले पर आधारित सहयोग से जुड़े क्षेत्रों में युवाओं, युवा संगठनों के प्रतिनिधियों और युवा संबंधी नीति निर्माताओं के प्रभारी सरकारी अधिकारियों का एक दूसरे देश में आवागमन शामिल है।
          दोनों देशों में युवा मामले पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और विचार गोष्ठियों मैं आमंत्रण के आदान-प्रदान, मुद्रित सामग्रियों, फिल्म और अनुभवों के आदान प्रदान पर भी यह लागू होगा।

       यह सहयोग दोनों देशों में युवा मामले पर आधारित अनुसंधान और अन्य जानकारी वाले क्षेत्रों, युवा शिविरों में भागीदारी, युवा उत्सवों और युवाओं के अन्य आयोजनों के लिए भी होगा।

Wednesday, 14 June 2017

साइबर सुरक्षा के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच समझौते पर हस्ताक्षर को मंजूरी

             प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को भारत और बांग्लादेश के बीच सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में पहले से हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के बारे में जानकारी दी गई।

         भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और बांग्लादेश के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रभाग के बीच अप्रैल 2017 में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह 5 वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होगा। इसके बाद दोनों पक्षों की आपसी लिखित सहमति द्वारा इसके प्रभावी रहने के दौरान किसी समय इस समझौते का विस्तार हो सकेगा।

            किसी एक पक्ष द्वारा अन्य पक्ष को छह माह की  लिखित पूर्व-सूचना के बाद इसे निरस्त किया जा सकेगा। सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र से जुड़ा यह समझौता स्वाभाविक तौर पर एक तकनीकी समझौता है और यह मुख्य रूप से ई-गवर्नेंस, एम-गवर्नेंस, ई-पब्लिक सर्विस डिलीवरी, साइबर सुरक्षा आदि पर जोर देता है।

          इस समझौते का लक्ष्य भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा बांग्लादेश में कारोबार के अवसरों और सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार की संभावनाएं तलाशना तथा भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है, जिससे अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।

भारत को एक बाजार की बजाय वैश्विक खाद्य फैक्ट्री बनाने के लक्ष्य

        खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने एएनयूजीए के आयोजकों के साथ संयुक्‍त सम्‍मेलन को संबोधित किया। एएनयूजीए खाद्य उद्योग के लिए एक अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार मंच है जो कि जर्मनी के कोलंगे में आयोजित होगा। 

       उन्‍होंने कोएल्‍नमेसे जीएमबीएच, (एएनयूजीए के आयो‍जक), प्रमुख परिचालन अधिकारी श्रीमती कैथरिना सी हमा के साथ समझौता ज्ञापन पर भी हस्‍ताक्षर किये। खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री ने कहा कि यह भारत के लिए सम्मान की विषय है कि वह एक सम्मानित अंतर्राष्ट्रीय समारोह में साझेदार देश बनने जा रहा है। इससे हमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ है। 

           मंत्री ने यह भी कहा कि खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग के समक्ष बहुत सारी चुनौतियां हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में हुए बदलावों के कारण उद्योग बाधाओं से पार पाने के लिए तैयार है। श्रीमती बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों में हमारी सरकार ने 9 नये मेगा फूड पार्क शुरू किये हैं, आपूर्ति अवसंरचना को मजबूत किया है, 6 हजार करोड़ रूपये के आवंटन से किसान संपदा योजना का क्रियान्वयन किया है, नाबार्ड के साथ 2 हजार करोड़ रुपये का कोष बनाया है जो वरीयता के आधार पर खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योगों को ऋण मुहैया करायेगा, करों को तर्कसंगत बनाया है, खाद्य क्षेत्र के खुदरा बाजार में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दी है इत्यादि। 


              इन कदमों से सरकार के भारत को एक बाजार की बजाय वैश्विक खाद्य फैक्ट्री बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा जर्मनी के कोलंगे में ब्रांड एएनयूजीए के साथ ब्रांड इंडिया भी सामानांतर खड़ा दिखाई देगा। श्रीमती बादल ने कहा दरअसल भारत सरकार द्वारा आयोजित वर्ल्ड फूड इंडिया में जर्मनी को साझेदार के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है। मंत्री ने जर्मनी में एएनयूजीए और फ्रांस में एसआईएएल जैसी अंतर्राष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनियों में भारत के भाग लेने से खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग की शक्तियों को प्रदर्शित के महत्व को स्वीकार किया।

            श्रीमती बादल ने जोर देकर कहा खाद्य नीति सभी बाधाओं को दूर करने और किसानों के जीवन को बदलने क काम करेगी। खाद्य प्रसंस्करण के उद्योगों के विकास से वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। हमें अपनी किसानों की तकनीक को उन्नत करना होगा और ना केवल खाद्य प्रसंस्करण में बल्कि कृषि प्रोद्यौगिकी में निवेश की आवश्यकता है। 

            मंत्री ने कहा कि हमें पश्चिमी देशों से सीखना होगा कि किस तरह से पैदावार और परिवहन के स्तर पर अपव्यय को नियंत्रित किया जाए। इस अवसर पर श्रीमती काठरिना सी हमा ने कहा कि उन्हें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत एएनयूजीए 2017 में साझेदार देश होगा। एएनयूजीए 2015 में 135 भारतीय प्रदर्शक थे वहीं कोलंगे में 7 अक्तूबर से 11 अक्तूबर तक एएनयूजीए 2017 में 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों के हिस्सा लेने की आशा जतायी जा रही है।

             एएनयूजीए 2017 में पहली बार खाद्य उद्योग में ई-कॉमर्स केंद्रित होगा। श्रीमती हमा ने कहा कि भारतीय खाद्य उद्योग को उसकी क्षमता और पाक कला संबंधी प्रतिस्पर्धा के लिए जाना जाता है। दुनिया भारतीय पाक व्यंजनों और इसकी विविधता की तरफ आकर्षित है। भारत में विविध प्रकार के मसाले पाये जाते हैं जो विश्व भर को निर्यात किये जाते हैं। उन्होंने भारत सरकार को नये मार्ग और नई पहलों के लिए बधाई दी।